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भूमि अधिग्रहण न होने से अधर में लटकी अर्जुन परियोजना

Mahoba

Updated Wed, 26 Sep 2012 12:00 PM IST
कबरई (महोबा)। कबरई क्षेत्र की 1940 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करने के लिए बनाई गई अर्जुन सहायक परियोजना अधिकारियों की लापरवाही के चलते अधर में लटक गई है। वर्ष 1978 में 28.29 करोड़ रुपए परियोजना की लागत वित्तीय और तकनीकी स्वीकृति के अभाव में 2010 में बढ़कर 900 करोड़ की हो गई। छह माह तक युद्धस्तर पर चले निर्माण कार्यों के बाद यह योजना बंद हो गई है जिससे लागत भी सवा गुना बढ़ जाने के आसार प्रबल हो गए हैं।
कबरई बांध के आसपास बड़ी मात्रा में कृषि योग्य असिंचित भूमि है जो कबरई बांध की अपर्याप्त जल संचयन क्षमता के कारण असिंचित है। कबरई बंाध का निर्माण 1952 में सिंचाई विभाग द्वारा कराया गया था। वर्ष 1978 से 2002 के बीच 1978 एवं 1992 में केवल दो बार ही 34 वर्षों में अपनी जल संचयन क्षमता के अनुरूप भरा जा सका है। बांध की जल संचयन क्षमता में वृद्धि करने के उद्देश्य से 1978 में क्षेत्र का सर्वे कर धसान नदी में वर्षा ऋतु के अतिरिक्त बह जाने वाले पानी को अर्जुन बांध बड़ी नहर के माध्यम से लाने और फिर बांध को भरने के बाद चंद्रावल बांध में पानी लाने के बाद कबरई बांध में पानी लाने का प्रावधान किया गया था।
इस योजना को तत्कालीन सरकार द्वारा स्वीकृति न दिए जाने के कारण उसे रोक दिया गया। 2002 में तत्कालीन विधायक सिद्धगोपाल साहू ने विधानसभा में मामला उठाकर इसे गर्मा दिया और फिर से इस योजना का सर्वे आदि का काम शुरू हो गया। तीनों बांधों को धसान नदी से नहर निकालकर इंटर कनेक्ट करने की योजना फिर से बनाई गई जिसमें कबरई बांध की ऊंचाई 9 मीटर बढ़ाने का प्राक्कलन बनाया गया और इस अर्जुन सहायक परियोजना की लागत बढ़कर 150 करोड़ हो गई। विधायक के लगातार प्रयास के बाद भी सपा की सरकार होने के बावजूद इसे मूर्त रूप नहीं दिला सके।
वर्ष 2009-2010 में इस योजना की अंतिम स्वीकृति 900 करोड़ रुपए के साथ दी गई। योजना का काम तेजी से शुरू हुआ और भूमि अधिग्रहण में मुआवजा दराें में भिन्नता के कारण पूरा काम ठप हो गया। कबरई बांध के जल संग्रहण परिधि में आने वाले किसानों ने काम रुकवा दिया जिससे पिछले दो वर्षों से इस परियोजना में काम बंद चल रहा है। बांध की जल संग्रहण क्षमता वृद्धि के बाद रबी की फसल 23650 हेक्टेयर तथा खरीफ में 12109 हेक्टेयर सिंचाई प्रस्तावित की गई है लेकिन परियोजना में सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई रुचि न लेने के कारण कबरई बांध में करोड़ों रुपए की मशीनें काम के अभाव में जंग खा रही हैं। कबरई बांध की क्षमता वृद्धि में कुल 110 करोड़ रुपए की लागत आनी है। जो अब देरी के चलते बढ़कर 150 करोड़ तक पहुंच जाएगी।

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