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टीचराें की कमी से जूझ रहा है शिक्षा विभाग

Mahoba

Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
महोबा। जिले में टीचराें की कमी के चलते प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। अंतर जनपदीय तबादलों से शिक्षकों की कमी कुछ हद तक पूरी होने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन वह भी नाकाफी रही। संपूर्ण साक्षरता अभियान के तहत हर बच्चे को शिक्षित करने सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
जिले में प्रदेश के बहराइच, बांदा, फतेहपुर, झांसी सहित तमाम जनपदों से 100 टीचर स्थानांतरित होकर आए हैं जिनकी आमद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के यहां हो गई है। अभी इन टीचराें को विद्यालय में तैनाती नहीं मिली है। बाहरी जिलों से आने वाले सभी टीचराें की आमद के बाद जिले में खाली स्कूलों की सूची चस्पा की जाएगी और इसके बाद महिला टीचराें से तीन स्कूलों के विकल्प लेकर उन्हें संबंधित स्कूल में तैनात किया जाएगा। महिलाआें को शासनादेश के मुताबिक स्कूल आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। विकलांगों को भी नजदीकी स्कूलों में विकल्प के अनुसार भेजा जाएगा। कार्यालय में रिक्त विद्यालयों की सूची चस्पा होने के बाद सभी गैर जनपदों से आमद कराने वाले टीचराें की काउंसलिंग होगी। इसके बाद उन्हें स्कूल आवंटित हो जाएगा।
जून में जिले के 82 टीचर सेवानिवृत्त हो चुके हैं। साथ ही 80 टीचर महोबा जिला छोड़कर अंतर जनपदीय स्थानांतरण के कारण अपने जिलों में जा चुके है। इस प्रकार 162 टीचराें की कमी होने के बाद इस जनपद को कुल 100 टीचर गैर जनपदों से तबादले के बाद मिले हैं। अभी तक सभी टीचराें ने अपनी आमद जिले में नहीं कराई है। उनकी आमद की अंतिम तिथि गुजर जाने के बाद ही टीचराें की कमी से संबंधित अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। कुल मिलाकर जब तक नए टीचराें की नियुक्तियां शासन स्तर से नहीं की जातीं तब तक जिले मेें टीचराें की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता।

इनसेट -------------------
जिले में 50 विद्यालयाें में लटक रहे ताले
महोबा। जिले में टीचराें की भारी कमी के कारण शिक्षा विभाग को अपने 50 से अधिक विद्यालय बंद करने पड़े। वहीं 175 से अधिक विद्यालय एक टीचर या शिक्षा मित्र के भरोसे चल रहे हैं या संबद्धीकरण कर किसी तरह से काम चलाकर स्कूलों को बंद होने से बचाया जा रहा है। इससे कुुछ हद तक स्कूली शिक्षा का लाभ ग्रामीण अंचलों को मिल सके। जिले में शिक्षा को पटरी पर लाने के लिए कम से कम 500 टीचराें की जरूरत है। तब हर गांव के बच्चों को शिक्षित करने का सपना पूरा हो सकेगा।


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