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झमाझम बारिश के बाद भी बेला सागर सरोवर प्यासा

Mahoba

Updated Thu, 09 Aug 2012 12:00 PM IST
बेलाताल (महोबा)। झमाझम बारिश के बाद भी ग्रामीणाें की प्यास बुझाने वाला बेला सागर सरोवर इस दफा खुद ही प्यासा रह गया है। हालत यह है कि बेला सागर भंडारण क्षमता का एक निशान भी नहीं छू सका जिससे पेयजल को लेकर ग्रामीण खासे चिंतित हैं।
गौरतलब है कि 2700 वर्ग हेक्टेयर में फैले बेला सागर तालाब से कसबे में पेयजल आपूर्ति होती है। इतना ही नहीं बेलाताल ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत जैतपुर, सतारी, दादरी, घटेरा, सुगिरा सहित आसपास के ग्रामीण इलाकाें में भी इसी सरोवर से आपूर्ति होती है लेकिन इस दफा क्षेत्र में कम बारिश होने के कारण लोगाें को पेयजल की समस्या सताने लगी है। हालत यह है कि आषाढ़ और सावन का महीना बीत जाने के बाद भी बेला सागर तालाब सूखा पड़ा है। उधर शासन द्वारा कसबा समेत तमाम गांवाें में पेयजल आपूर्ति के लिए करोड़ाें की लागत से पेयजल समूह योजना स्वीकृत की गई है लेकिन बेला सागर तालाब में पानी न होने के कारण सारी योजनाएं इस क्षेत्र में सफल होती नहीं दिख रही हैं। इससे पेयजल को लेकर ग्रामीण खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। शासन ने बेलाताल क्षेत्र के ग्रामीणाें की प्यास बुझाने के लिए लाखाें रुपए की लागत से योजना शुरू करा दी ताकि इसके चालू होेने के बाद यहां के बाशिंदाें को भरपूर पानी मिल सके।

इनसेट -------------------
तालाब में पानी न आने से सिंचाई को लेकर किसान चिंतित
बेलाताल (महोबा)। बेला सागर सरोवर में पानी बेहद कम होने के कारण किसानाें की चिंता बढ़ गई है। पिछले पांच वर्षों से बेला सागर तालाब न भरने के कारण किसानाें को इस दफा सरोवर में पानी आने की उम्मीद थी लेकिन सावन का महीना बीत जाने के बाद सरोवर जस का तस है। अब खेताें की सिंचाई कैसे होगी, यह सोचकर किसान खासे परेशान हैं। राधेलाल अग्रवाल, हरगोविंद पटैरिया, बलराम यादव, धूराम यादव, देवकी नंदन पाराशर, देशराज अहिरवार, भागीरथ कुशवाहा, शंकरलाल कुशवाहा आदि किसानाें का कहना है कि बेला सागर सरोवर से जैतपुर समेत तमाम गांवाें को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलता है। इस दफा अच्छी बारिश की उम्मीद थी लेकिन दो माह बीतने के बाद भी सरोवर में पानी बेहद कम है। किसानाें ने बताया कि पहले तेज धूप और अब बारिश के कारण तिली व उर्द की फसल खराब हो गई। वहीं सिंचाई के लिए कम पानी देखकर अन्य फसलें प्रभावित होने की आशंका है।

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