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जंग जीतने से कम नहीं आय, जाति प्रमाण पत्र बनवाना

Mahoba

Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
महोबा। जुलाई में स्कूलाें में शुरू हुए एडमिशन और छात्रवृत्ति के लिए आय प्रमाण पत्र हासिल करना छात्राें और अभिभावकाें के लिए जंग जीतने से कम नहीं है। हालत यह है कि तहसील स्थित एकल खिड़की में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सैकड़ाें की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। वहीं एकल खिड़की संचालकाें की लापरवाही के चलते 15 दिन बाद भी लोगाें को प्रमाण पत्र हासिल नहीं हो रहे हैं।
गौरतलब है कि जुलाई में स्कूलाें में दाखिले और छात्रवृत्ति के लिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसी के चलते तहसील प्रांगण स्थित एकल खिड़की में आय, जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन दिनाें खासी भीड़ उमड़ रही है। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दूर दराज के गांवाें से आने वाले ग्रामीण और छात्र यहां कागजात, स्टांप और अभिलेखीय औपचारिकता पूरी करने के बाद उसी दिन एकल खिड़की में जमा कर देते हैं लेकिन एकल खिड़की संचालक की लापरवाही के चलते उन्हें निर्धारित समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं। पंद्रह दिन पहले फार्म जमा करने वाले सैकड़ाें छात्र और ग्रामीण रोजाना एकल खिड़की के चक्कर लगाकर घर लौटने को मजबूर हैं। ग्राम सिजहरी के शिवकुमार, राजू, पवा के सुनील, बालादीन, बिलखी के लालदिमान, बैजू, बीला दक्षिण के रामसहाय, मातादीन आदि ने बताया कि पंद्रह दिन पहले एकल खिड़की में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म जाम किया था लेकिन आज तक प्रमाण पत्र नहीं बन सके हैं। ग्रामीणाें का आरोप है कि नियमानुसार 20 रुपए शुल्क अदा करने के बाद भी समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहे हैं। जबकि 100-100 रुपए लेकर खास लोगाें के तत्काल प्रमाण पत्र बनाकर दिए जा रहे हैं। यहां दलालाें की सक्रियता के चलते आम लोगाें को आसानी से प्रमाण पत्र हासिल करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

इनसेट -------------------
चरखारी के प्रमाण पत्र कुलपहाड़ से हो रहे निर्गत
महोबा। चरखारी तहसील में चार माह से रिक्त तहसीलदार के पद का कार्यभार कुलपहाड़ तहसीलदार के सहारे चल रहा है। तहसील क्षेत्र के सैकड़ाें लोग आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए रोजाना चक्कर लगा रहे हैं। जब सैकड़ाें फार्म एकत्र हो जाते हैं तो कुलपहाड़ तहसीलदार से हस्ताक्षर बनवाए जा रहे हैं जिससे दो-दो तीन-तीन दिन अभिलेख बनवाने के लिए ग्रामीण और छात्र-छात्राएं तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

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