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उत्पादन का पांचवां हिस्सा भी नहीं हुई खरीद

Mahoba

Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
महोबा। जिले में गेहूं के रिकार्ड तोड़ उत्पादन के पांचवे हिस्से के बराबर भी क्रय केंद्राें में खरीद नहीं हुई। प्रदेश सरकार द्वारा जारी खरीद न करने के फरमान सुनते ही क्रय केंद्र प्रभारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। गोदामाें में जगह का अभाव तो कहीं निर्देशाें का हवाला देकर किसानाें को टरकाया जा रहा है फिर भी दो तीन दिनाें से ट्रैक्टराें में लदी उपज के साथ किसान केंद्राें में डेरा जमाए हैं। उन्हें अभी भी गेहूं खरीद का इंतजार है।
जिले में कृषकाें को समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने की मंशा से खुले सरकारी 19 क्रय केंद्र गेहूं की उपज का पांचवां हिस्सा भी नहीं खरीद सके। किसान सरकारी दर पर उपज बेचने के लिए केंद्राें पर दिन रात जुटे हैं फिर भी खरीद नहीं हो रही है। सोमवार को प्रदेश सरकार ने क्रय केंद्राें में किसानाें का गेहूं न खरीदने का जैसे ही निर्देश दिया। इधर केंद्राें के प्रभारियाें पर उसका असर दिख रहा है। केंद्र प्रभारी अब कई दिनाें से केंद्राें पर उपज लेकर डटे किसानाें को लौटाने लगे हैं। गौरतलब है कि जिले में 19 क्रय केंद्राें को खोलकर लक्ष्य खरीद 11998 मीट्रिक टन के सापेक्ष अब तक 17500 मीट्रिक टन की खरीद हुई है जबकि जिले में 90 हजार मीट्रिक टन के करीब गेहूं उत्पादन के आंकड़े हैं। अभी भी उत्पादन के सापेक्ष हुए क्रय के बाद भी 72500 मीट्रिक टन गेहूं किसानाें का नहीं खरीदा गया। कबरई, महोबा, चरखारी, कुलपहाड़, जैतपुर में खरीद कुछ ही केंद्राें में चल रही है। अजनर में गोदाम में जगह न होने के कारण तीन दिन से खरीद ठप है इसलिए किसान क्रय केंद्र में डेरा जमाए बैठे हैं। तीन दिन से गोदाम में उपज लादकर खरीद का इंतजार कर रहे ग्राम भगारी के कृषक नरेंद्र दीक्षित और वीरेंद्र दीक्षित ने बताया कि खुले मौसम में निजी व्यवस्था से उपज को ढककर तौल का इंतजार कर रहे हैं। यहां बारिश से कृषकाें की उपज के बचाव के लिए जगह नहीं है।
इसी तरह चरखारी के क्रय विक्रय केंद्र में बैठे कनेरा के कृषक रामेश्वर द्विवेदी, रविंद्र सिंह, रिवई के चंद्रपाल सिंह ने बताया कि बारदाना न होने के कारण सोमवार को उपज की तौल हो पाई है। अब मंगलवार से क्रय केंद्र ठप करने की बात कही जा रही है जबकि कई किसान अब भी फसल बेचने के लिए उपज लेकर पहुंच रहे हैं। अधिकतर क्रय केंद्राें पर बारिश से गेहूं को बचाने के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। बेलाताल में तो गेहूं खुले आसमान के नीचे रखा है जिस पर कभी भी बारिश से भीगने का खतरा है। इसी तरह श्रीनगर में क्रय केंद्र के गोदाम का अधिकतर हिस्सा दरकने के कारण अंदर रखा गेहूं भी सड़ने के आसार हैं।
चरखारी के पीसीएफ केंद्र के गोदाम में कई जगह दरारें हैं। यहां बारिश से गेहूं को कभी भी नुकसान हो सकता है। किसान ब्रजगोपाल, भुल्ला और प्रभूदयाल ने बताया कि गोदाम में जगह न होने के कारण खरीद आठ दिन से ठप है। रोजाना दर्जनाें कृषक उपज लेकर आते हैं। खरीद न होने से फुटकर बाजार में बेचने को मजबूर हैं। प्रभारी अर्थ एवं संख्या एवं जिला उद्यान अधिकारी अनीस श्रीवास्तव ने कहा कि उपज के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। वहीं अधिकारी उप कृषि निदेशक जीसी कटियार ने बताया कि इस वर्ष गेहूं का उत्पादन अच्छा हुआ है। अनुकूल मौसम होने के कारण 90 हजार मीट्रिक टन के करीब उत्पादन हुआ है।

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अपनी ही बात से मुकर गई सरकार- रामरतन
महोबा। भारतीय किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रामरतन गुरुदेव ने कृषकाें की हिमायत करते हुए कहा कि सरकार को उत्पादन के आंकड़ाें को देखते हुए क्रय केंद्राें में खरीद का समय और बढ़ाना चाहिए था। अव्यवस्थाआें के बीच दो माह के दौरान बामुश्किल 30 दिन ही खरीद सुचारु रूप से चली है। कृषकाें को समर्थन मूल्य दिलाने की मंशा रखने वाली सरकार अब अपने ही निर्देश से मुकर कर क्रय केंद्राें की खरीद ठप कर रही है जिससे कृषकाें की बड़े पैमाने पर क्षति होगी। खुले बाजार में औने पौने दामाें पर उपज बेचने को किसान मजबूर हो जाएंगे।

इनसेट -------------------
‘कृषकाें की बकाया 2.5 करोड़ की देनदारी’
महोबा। डिप्टी आरएमओ आरएन सिंह याव का कहना है कि 19 क्रय केंद्राें के सहारे लक्ष्य खरीद 11998 के सापेक्ष 17500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई है जिसमें कमीशन एजेंटाें के माध्यम से 2100 मीट्रिक टन एवं कृषकाें से 15400 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। हालांकि अब तक 2.5 करोड़ से अधिक की देनदारी कृषकाें की बकाया है। उन्हाेंने बताया कि पीसीएफ के क्रय केंद्र 26 जून से बंद होने की जानकारी मिली है। अन्य क्रय केंद्राें में उपलब्ध बारदाना के मुताबिक एक दो दिन खरीद और चलने की उम्मीद है। क्रय केंद्राें के गोदामाें पर रखे गेहूं को सुरक्षित ले जाने के लिए संबंधित विभाग को अवगत करा दिया गया है। केंद्राें पर खुले मैदान में रखे गेहूं की सुरक्षा की व्यवस्था अलग से की जा रही है।

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