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गर्मी से खरेला में जबरदस्त पेयजल संकट बैलगाड़ियाें से ढोकर ला रहे पानी

Mahoba

Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
खरेला (महोबा)। भीषण गर्मी के चलते सरोवराें, झीलाें के तेजी से सूख रहे पानी के चलते जलस्तर काफी नीचे खिसक गया है जिससे हैंडपंपाें और कुआें ने जवाब दे दिया है। इससे कसबे में पेयजल संकट बढ़ गया है। नगर की आए दिन पानी की आपूर्ति ठप हो जाने से ग्रामीण कहीं बैलगाड़ियाें के सहारे तो कहीं ठेलिया पर गैलन लादकर दूर दराज से पानी ला रहे हैं। एक सप्ताह से पानी के लिए मची धमाचौकड़ी का निवारण नहीं हो पा रहा है। पेयजल को लेकर ग्रामीणाें में आक्रोश है।
नगर पंचायत खरेला में बड़ी आबादी के बीच 7.50 करोड़ की लागत से सामूहिक पेयजल योजना की स्थापना भले ही हुई हो, लेकिन ग्रामीणाें को यहां बूंद-बूंद पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। गर्मी आते ही यहां पेयजल की विकराल समस्या प्रतिवर्ष उभर आती है। जिसका नमूना यहां सरेआम दिख रहा है। पिछले एक सप्ताह से पेयजल आपूर्ति कभी पंप जलने से तो कभी पाइप लाइन फटने और कभी कम बिजली मिलने के चलते ठप हो जाती हैै। दो वर्ग किलोमीटर के दायरे में बसी आबादी के बीच पुरातन काल से खारा पानी होने के कारण लोगाें को गांव के बाहर से मीठा पानी कुआें और पोखरों से लाना पड़ता था। समस्या के निदान के लिए सामूहिक पेयजल योजना को स्वीकृत कराकर दस वर्ष पहले लोकार्पण किया गया। इससे 15 हजार की आबादी को मीठा पानी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन सामूहिक पेयजल योजना मंसूबाें पर पानी फेर रही है।
बढ़ते पेयजल संकट के मद्देनजर ग्रामीण बैलगाड़ियाें में डिब्बे, गैलन लादकर दो किलोमीटर दूर से पानी ला रहे हैं। वहीं तीन पहिया रिक्शे में गैलनाें को लादकर पानी लाने के साथ-साथ कई लोग साइकिलों में डिब्बाें के सहारे पानी ले जाने में मशक्कत कर रहे हैं। मामले पर जल संस्थान के अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं। पेयजल आपूर्ति ठप होने से यहां पेयजल समस्या संघर्ष से कम नहीं है। नगर के मुन्ना सेंगर, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र, पुष्पेंद्र सिंह, लखनलाल, मेवालाल, हेमंत, राजकुमार, अनुपम सिंह आदि ने बताया कि पानी की किल्लत का निराकरण करने के लिए महकमा कोई प्रयास नहीं कर रहा है। बूंद-बूंद पानी के लिए यहां सुबह से शाम तक जूझना पड़ रहा है। जल संस्थान के जेई एसके वर्मा का कहना है कि पेयजल आपूर्ति नियमित कराए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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