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मनरेगा के कार्यों को ढूंढे नहीं मिल रहे मजदूर

Mahoba

Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर (महोबा)। पिपरमेंट की खेती के बढ़ते रुझान के चलते किसानाें का मनरेगा के कार्यों से मोहभंग होता जा रहा है। इसके चलते प्रधानाें को मजदूर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं जिससे क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहा है कई जगह कार्य शुरू तक नहीं हो पा रहा है।
श्रीनगर क्षेत्र के अधिकतर गांवाें में पिपरमेंट की फसल की तरफ किसानाें का रुझान होने से मनरेगा के कार्यों को ग्रामीण तवज्जो नहीं दे रहे हैं। आलम यह है कि ग्राम पंचायताें में काम के लिए प्रधानाें को मजदूर तलाशे नहीं मिल रहे हैं। इससे मनरेगा के काम बंद होकर रह गए हैं। मजदूराें को मनरेगा से ज्यादा पैसा फसल की निराई में मिल रहा है। श्रीनगर, बरा, सिजवाहा, भंडरा, मवई, ढिकवाहा, ज्योरइया, डिगरिया, सिजरिया, बिलरही, कैमाहा, अतरार माफ, इमिलिया में आधे से जयादा किसान पिपरमिंट की फसल के काम में लगे हुए हैं। कम समय में पैदा होने वाली एवं ज्यादा लाभ का सौदा साबित होने से किसानाें का रुझान इस खेती की तरफ तेजी से बढ़ा है। फसल की निराई का दौर होने से गांवाें में मजदूराें का टोटा हो गया है। पुरुष महिलाएं एक से दूसरे गांवाें में फसलाें की निराई करने जाते हैं। इससे इन ग्राम पंचायताें में मनरेगा के कार्य ठप होकर रह गए हैं। ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक और ग्राम पंचायत अधिकारी इससे परेशान नजर आ रहे हैं और मजदूराें से मिन्नतें करने में लगे हैं लेकिन मजदूरी ज्यादा मिलने के कारण जाबकार्ड धारक कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। श्रीनगर के जाबकार्ड धारक कल्लू श्रीवास, वल्दू कुशवाहा, छिकौड़ीलाल, गोपीराम, मदन अहिरवार बताते हैं कि पिपरमिंट की निराई करने में मेहनत नहीं करनी पड़ती है और मजदूरी 150 से 200 रुपए है जबकि मनरेगा में 120 रुपए ही मजदूरी मिलती है। साथ ही भुगतान के लिए बैंकाें के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस कार्य का भुगतान खेत मालिक नगद दे रहे हैं। ग्राम अतरारमाफ के जाबकार्ड धारक खरगा, देवेंद्र, करन आदि का कहना है कि पिपरमिंट के कारण खेत में ठंडक ज्यादा रहती है। इससे वहां चिलचिलाती धूप का अहसास नहीं होता और पूरे परिवार इस कार्य से जुड़े रहते हैं। मनरेगा में काम प्राप्त करने के लिए प्रधान की चिरौरी करनी पड़ती है। ग्राम प्रधान श्रीनगर यशोदा कोरी और ग्राम प्रधान बिलरही कल्लू यादव बताते हैं कि मजदूराें का टोटा होने से मनरेगा से होने वाले विकास कार्य रुककर रह गए हैं।
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