आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

मनरेगा के कार्यों को ढूंढे नहीं मिल रहे मजदूर

Mahoba

Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर (महोबा)। पिपरमेंट की खेती के बढ़ते रुझान के चलते किसानाें का मनरेगा के कार्यों से मोहभंग होता जा रहा है। इसके चलते प्रधानाें को मजदूर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं जिससे क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहा है कई जगह कार्य शुरू तक नहीं हो पा रहा है।
श्रीनगर क्षेत्र के अधिकतर गांवाें में पिपरमेंट की फसल की तरफ किसानाें का रुझान होने से मनरेगा के कार्यों को ग्रामीण तवज्जो नहीं दे रहे हैं। आलम यह है कि ग्राम पंचायताें में काम के लिए प्रधानाें को मजदूर तलाशे नहीं मिल रहे हैं। इससे मनरेगा के काम बंद होकर रह गए हैं। मजदूराें को मनरेगा से ज्यादा पैसा फसल की निराई में मिल रहा है। श्रीनगर, बरा, सिजवाहा, भंडरा, मवई, ढिकवाहा, ज्योरइया, डिगरिया, सिजरिया, बिलरही, कैमाहा, अतरार माफ, इमिलिया में आधे से जयादा किसान पिपरमिंट की फसल के काम में लगे हुए हैं। कम समय में पैदा होने वाली एवं ज्यादा लाभ का सौदा साबित होने से किसानाें का रुझान इस खेती की तरफ तेजी से बढ़ा है। फसल की निराई का दौर होने से गांवाें में मजदूराें का टोटा हो गया है। पुरुष महिलाएं एक से दूसरे गांवाें में फसलाें की निराई करने जाते हैं। इससे इन ग्राम पंचायताें में मनरेगा के कार्य ठप होकर रह गए हैं। ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक और ग्राम पंचायत अधिकारी इससे परेशान नजर आ रहे हैं और मजदूराें से मिन्नतें करने में लगे हैं लेकिन मजदूरी ज्यादा मिलने के कारण जाबकार्ड धारक कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। श्रीनगर के जाबकार्ड धारक कल्लू श्रीवास, वल्दू कुशवाहा, छिकौड़ीलाल, गोपीराम, मदन अहिरवार बताते हैं कि पिपरमिंट की निराई करने में मेहनत नहीं करनी पड़ती है और मजदूरी 150 से 200 रुपए है जबकि मनरेगा में 120 रुपए ही मजदूरी मिलती है। साथ ही भुगतान के लिए बैंकाें के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस कार्य का भुगतान खेत मालिक नगद दे रहे हैं। ग्राम अतरारमाफ के जाबकार्ड धारक खरगा, देवेंद्र, करन आदि का कहना है कि पिपरमिंट के कारण खेत में ठंडक ज्यादा रहती है। इससे वहां चिलचिलाती धूप का अहसास नहीं होता और पूरे परिवार इस कार्य से जुड़े रहते हैं। मनरेगा में काम प्राप्त करने के लिए प्रधान की चिरौरी करनी पड़ती है। ग्राम प्रधान श्रीनगर यशोदा कोरी और ग्राम प्रधान बिलरही कल्लू यादव बताते हैं कि मजदूराें का टोटा होने से मनरेगा से होने वाले विकास कार्य रुककर रह गए हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

क्या ये गाने आपको पुराने दौर में ले जाते हैं, सुनकर कीजिए तय

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा की ये कहानी आपके दिल को छू जाएगी

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

हर उभरती हीरोइन को कंगना से सीखनी चाहिए ये 6 बातें, सफलता चूमेगी कदम

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

WhatsApp लाया अब तक का सबसे शानदार फीचर, आपने आजमाया क्या ?

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

बेसमेंट के वास्तु दोष को ऐसे करें दूर

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

Most Read

काशी की महिला ज्योतिषियों ने बताया यूपी चुनाव का परिणाम

femal astrologers from kashi tell about result of up electionp
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

पांच दिन बंद रहेंगे बैंक

Banks closed five days
  • गुरुवार, 16 फरवरी 2017
  • +

यूपी चुनाव 2017 : एक गांव में एक वोट पड़ा दूसरे में एक भी नहीं, कारण जानकर रह जाएंगे हैरान

vilagers  voting boycott in kanpur
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

भितरघात की चिंगारी से झुलसती सपा

spark of sabotage scorched SP
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

खुशखबरी : 15 अप्रैल से यहां हाेगी सेना रैली भर्ती, 13 जिलाें के अभ्यर्थी अभी करें अावेदन

sena bharti rally in kanpur
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

IPL-10 में धूम मचाने को तैयार यूपी के ये 10 खिलाड़ी

ten players from up select in ipl
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top