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खेताें में पलेवा के लिए सिंचाई को पानी ढूंढ रहे हैं किसान

Mahoba

Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
बेलाताल (महोबा)। बेलासागर तालाब में सिंचाई के लिए जल भंडारण न होने से क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव के किसानाें के सामने सिंचाई का संकट गहराने लगा है। खेताें को पलेवा के लिए पानी मिलने की उम्मीद क्षीण देख किसान खासे चिंतित हैं।
बेलाताल में 2700 वर्ग हेक्टेयर में फैले बेला सागर में जल भंडारण क्षमता के सापेक्ष एक चौथाई पानी न होने से किसानाें पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बेला सागर के पानी पर सिंचाई के लिए निर्भर 12 गांवाें के कृषकाें को सिंचाई के लिए पानी तो दूर पेयजल के लिए पर्याप्त पानी मिल पाना मुश्किल हो गया है। पर्याप्त बारिश होने के बाद भी सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते लाखाें रुपए खर्च के बावजूद जल भंडारण बेला सागर तालाब में नहीं हो पाया जिसका खामियाजा क्षेत्र के किसानाें को भुगतना पड़ेगा। मोहल्ला व्यासपुरा के कृषक अशोक कुमार, देवकी नंदन, घुसियाना के मातादीन यादव, कल्लन यादव का कहना है कि बेला सागर तालाब में सिंचाई के लिए पानी न होने से जैतपुर सहित सतारी, बौरा, चुरारी, दादरी, घटेरा, सुगिरा, कुलपहाड़ सहित 12 गांवाें में हजाराें किसानाें के सामने सूखा की स्थिति झलकने लगी है। तालाब से सिंचाई के लिए बूंद भर पानी मिलने की उम्मीद नहीं है। किसानाें ने खेताें की जुताई करवा ली, लेकिन बुवाई के पहले खेताें को पानी न मिलने से किसानाें के अरमानाें पर पानी फिर रहा है। सूखे पड़े खेताें को देख रहे किसानाें के सामने भुखमरी की संभावना मुंह बाए खड़ी है। इधर बारिश का समय बीत जाने से किसानाें को बारिश का भरोसा भी टूट गया है। कृषकाें ने सिंचाई के लिए निर्भर बेला सागर में जल भंडारण के लिए लाखाें खर्च के बाद भी जल भंडारण में कोताही करने वाले महकमे की हकीकत की जांच कराए जाने की मांग की। कृषकाें का कहना है कि अगर किसानाें के हिताें की अनदेखी की गई तो किसान सड़काें पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे।

इनसेट -------------------
23 लाख खर्च फिर भी बेला सागर सूखा
बेलताल (महोबा)। बारिश के मौसम में पर्याप्त बारिश के बावजूद प्रसिद्ध बेला सागर में क्षमता के अनुरूप भंडारण करने में उदासीन रहे सिंचाई विभाग के अधिकारियाें को कृषक जिम्मेदार मान रहे हैं। किसानाें का कहना है कि बेला सागर में पानी भरने के मुख्य स्रोत धवल नाला निर्माण के नाम पर स्वीकृत 23 लाख रुपए की धनराशि खर्च कर दी गई लेकिन बेला सागर में क्षमता के मुताबिक जल का संचय नहीं हो पाया। इससे किसानाें के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानाें ने मामले की जांच कराते हुए जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

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