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दो माह में महज 10,353 मीट्रिक टन की खरीद

Maharajganj

Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
महराजगंज। सरकारी धान खरीद योजना को ग्रहण लग गया है। शासन का स्पष्ट दिशा निर्देश न होने के चलते किसानों को सांसत झेलनी पड़ रही है। हालत यह है कि राइस मिलर्स चावल खाली न होने की हालत में वे पहले से ही यहां से लेकर लखनऊ तक आंदोलनरत हैं। वहीं मार्केटिंग इंस्पेक्टरों की हड़ताल ने व्यवस्था और खराब कर दी है। इस साल 1,16,030 मीट्रिक टन धान खरीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खरीद शुरू हुए दो महीने बीत गए हैं लेकिन अभी तक महज 10353 मीट्रिक टन धान की ही खरीददारी हो सकी है। किसान अपनी उपज बेचने को लेकर हलकान हैं।
इस साल जिले में किसानों से धान खरीदने के लिए 114 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। उनको पहली अक्टूबर 2012 से 28 फरवरी 2013 के बीच 1,16,030 मीट्रिक टन धान की खरीद कर लेनी है। लेकिन अभी तक तमाम क्रय एजेंसियों की बोहनी तक नहीं हुई है। पिछले साल 95,000 मीट्रिक टन टारगेट से ज्यादा 1,13,336 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। इस साल दो महीने में 10,353 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। धान की खराब खरीद के चलते किसान बेहद परेशान हैं। दूसरी ओर राइस मिलर्स के दबाव के चलते मार्केटिंग इंस्पेक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। उनका कहना है कि जब तक शासन की कोई स्पष्ट नीति नहीं आ जाती वे आंदोलन जारी रखेंगे।
राइस मिलर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पशुपति नाथ गुप्त का कहना है कि प्रदेश सरकार से इस संबंध में बातचीत की गई है। प्रदेश में एक अधिकारी पंजाब का चावल मंगवाकर सप्लाई करा रहे हैं। यहां चावल नहीं उतर रहा है। गोदाम भरे पड़े हैं। उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था ठीक नहीं हो जाती वे सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे।
इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी राजूप्रसाद पटेल का कहना है कि उनकी कोशिश है कि अधिक से अधिक धान खरीद हो ताकि किसानों को राहत मिल सके।
नहीं बदले गए नमी मापक यंत्र
जिले के सरकारी कांटों पर 50 नमी मापक यंत्र उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। लेकिन उसमें से अधिकतर पहले ही कंडम घोषित किए जा चुके हैं। इसको लेकर डीएम सच्चिदानंद दुबे ने प्रमुख सचिव खाद्य को पत्र भी लिखा था। उसमें कहा गया था कि मण्डी समिति की ओर से पिछले सत्र में उपलब्ध कराए गए नमी मापक यंत्र घटिया क्वालिटी के थे। जिसके चलते वे जल्दी खराब हो गए। लिहाजा उनकी जगह नए यंत्र मुहैया कराए जाएं। जिससे धान की क्वालिटी जांच कर खरीद की जा सके। लेकिन उसके बावजूद अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसके चलते विवश होकर कंडम हो चुके पुराने यंत्र का ही सहारा लिया जा रहा है। जिसकी रीडिंग कितनी विश्वसनीय होगी। यह बताने की जरूरत नहीं है।
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