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रेल लाइन बने तो माल मंगाने में आसानी

Maharajganj

Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
महराजगंज। जिला मुख्यालय अभी तक रेलमार्ग से नहीं जुड़ सका है, जबकि जिला बने 23 साल बीत गए हैं। इन सालों में हर पार्टी के नेताओं ने वादा किया, लेकिन कोई उसे पूरा नहीं कर सका। अब रेलमार्ग के लिए आम जनता आवाज उठाने लगी है। व्यापारियों का कहना है कि रेलवे की सुविधा नहीं होने के कारण माल ढुलाई में अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है। इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ता है।
ट्रांसपोर्ट का खर्च बचेगा
जिले के प्रमुख पुस्तक व्यवसायी और स्टेशनरी सप्लायर अजय सिंह का कहना है कि जिला मुख्यालय का रेलमार्ग से न जुड़ना खलता है। ट्रांसपोर्ट के जरिए बाहर से सामान मंगाने पर अधिक रकम खर्च होती है। अगर वही माल ट्रेन से आए पर रुपये बचेंगे। महराजगंज माल सप्लाई का एकमात्र जरिया सड़क है। अगर रेलवे ट्रैक बिछ जाए तो काम काफी आसान हो जाएगा।
गोरखपुर में उतारना पड़ता माल
कपड़ा व्यवसायी विकास जालान विक्की का कहना है कि रेलवे के बिना विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उनके यहां गुजरात और महाराष्ट्र से कपड़े मंगाए जाते हैं। ट्रेन से सीधे महराजगंज तक आने की व्यवस्था नहीं होने के कारण माल गोरखपुर में उतार दिया जाता है। वहां से फिर दोहरा खर्च कर सामान मंगाया जाता है। लिहाजा वह खर्च भी रेट में जोड़ना मजबूरी है।
उठाना पड़ता है नुकसान
किराना सामानों के थोक और फुटकर सप्लायर अशोक टिबड़ेवाल मुख्यालय पर रेल सुविधा नहीं होने से काफी मर्माहत हैं। उन्होंने कहा कि किराना कारोबार में कई तरह के मसाले और अन्य सामान शामिल हैं। इसके परिवहन को लेकर काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है। रेलवे की सुविधा होती तो कम नुकसान उठाना पड़ता। बाहर से माल सड़क मार्ग से मंगाना ज्यादा खर्चीला होता है।
कारोबार पर पड़ता है असर
नगर में बिस्कुट एजेंसी चलाने वाले युगुल किशोर का कहना है कि रेलवे और सड़क परिवहन में काफी भिन्नता है। सड़क की तुलना में रेल परिवहन सस्ता पड़ता है। इससे सामान मंगाने में खर्चे काफी कम हो जाते हैं। इसका सीधा लाभ ग्राहकों को मिलता है। इसके अलावा कारोबार का दायरा भी बढ़ता है। जिला मुख्यालय को रेलमार्ग से जोड़ा जाना चाहिए।
कानपुर से सीधे नहीं आता माल
जिला मुख्यालय पर स्टील की आलमारी, कुर्सी, मेज, रैक निर्माण और बिक्री करने वाले विनोद अग्रहरी का कहना है कि कारोबार के विकास में रेलमार्ग का न होना बाधक है। कानपुर से माल मंगाने पर सीधे महराजगंज तक सप्लाई का प्रबंध नहीं है। ऐसे में विवश होकर गोरखपुर से दूसरे साधन का प्रबंध करना पड़ता है। इसमें अधिक रकम खर्च हो जाती है।
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