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पता बताने के काम आ रहे एक करोड़ के हाईमास्ट

Maharajganj

Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। महेंद्र की दुकान हाईमास्ट के पूरब तरफ स्थित है। पप्पू का घर गांव में लगे लैंप के पास है। इससे रात में इनका घर रोशन होना चाहिए, लेकिन ये हाईमास्ट लैंप हाथी के दांत साबित हो रहे हैं। लगने के कुछ महीने बाद ही खराब पड़े इन हाईमास्ट लैंप को खुद ही उजाले की दरकार है।
पिछली विधानसभा के गठन के दौरान जिले के पांच विधायकों ने अपने कार्यकाल में विधायक निधि से 103 हाईमास्ट लैंप लगवाए। इनमें से सिर्फ एक पनियरा दुर्गा मंदिर का हाईमास्ट जल रहा है। बाकी बेकार पड़े हैं।
श्यामदेउरवा से समाजवादी पार्टी के विधायक रहे जनार्दन प्रसाद ओझा ने पिछले कार्यकाल में 19 हाईमास्ट लगवाए थे। 2007-08 में पहले सात और बाद में छह लैंप लगवाए। प्रति लाइट एक लाख 25,600 रुपये की दर से कुल 8.79 लाख रुपये रिलीज किए गए। फिर उसी सत्र में तीन लाइट को एक लाख 23,600 रुपये की दर से लगाया गया। उस पर तीन लाख 70,800 रुपये खर्च हुए। इसी तरह 2008-09 में उन्होंने एक लाख 35 हजार रुपये की दर से एक लाइट और लगवाया। उससे पहले उन्होंने 2005-06 मेें भी दो लाइट लगवाया था। उस पर एक लाख 35 हजार रुपये की दर से 2.70 लाख रुपये खर्च हुए थे। इनमें से एक भी लाइट नहीं जल रही हैं।
बसपा खेमे से पनियरा विधायक व मंत्री रहे फतेह बहादुर सिंह ने भी 2006-07 में पांच हाईमास्ट लगवाए। इसके लिए एक लाख 25 हजार रुपये की दर से 5.80 लाख रुपये दिए गए। हाईमास्ट लगाने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था पैक्सफेड गोरखपुर को सौंपी गई। लेकिन उसमें से केवल दुर्गा मंदिर के सामने लगवाई गई लाइट ही जल रही है। बाकी सब बेकार पड़े हैं।
सबसे अधिक हाईमास्ट लगवाने का श्रेय लक्ष्मीपुर से सपा विधायक रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को जाता है। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल के 2009-10 में एकमुश्त 31 लाइट को के लिए प्रस्ताव डीआरडीए को भेजा। एक लाख 35 हजार रुपये की दर से 41.85 लाख रुपये क्षेत्र विकास निधि से इस पर खर्च हुए। उनके प्रस्ताव पर ग्रामीण अभियंत्रण सेवा ने लाइट लगाने का काम किया। इनमें से एक भी लाइट नहीं जल रही हैं।
सिसवा विधानसभा से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले अवनीन्द्र नाथ उर्फ महंत दुबे ने भी हाईमास्ट लगवाने में दिल खोलकर धन रिलीज किया। 2007-08 मेें उन्होंने निचलौल ब्लाक में एक साथ 28 हाईमास्ट लगवाने का प्रस्ताव डीआरडीए को भेजा। एक लाख 35,600 रुपये की दर से 37,96,600 रुपये रिलीज किए गए। उसी साल उन्होंने मिठौरा गांव में एक हाईमास्ट एक लाख 1700 रुपये में लगवाया। हाईमास्ट लगवाने का काम श्रम एवं निर्माण विभाग ने कराया। उनके कार्यकाल में लगी सभी लाइट बुझ गई हैं। कुछ में तो अभी कनेक्शन ही नहीं चालू हो सका है।
सदर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक रहे श्रीपति आजाद एक ही वित्तीय वर्ष 2007-08 में 19 हाईमास्ट का प्रस्ताव प्रशासन को दिया। उनके एक लाइट की कीमत 1,24,368 रुपये तय हुई। डीआरडीए ने क्षेत्र विकास निधि से 23.63 लाख रुपये रिलीज किए। हाईमास्ट श्रम एवं निर्माण विभाग ने लगवाए। आज एक भी नहीं जल रहे हैं।
40 फीसदी तय है कमीशन
कार्यदायी संस्था को लाइट लगाने की जिम्मेदारी वैसे ही नहीं मिल जाती है। उसके एवज में उनको सौदा करना पड़ता है। जिस ठेकेदार को काम सौंपा जाता है, उससे पहले ही 40 फीसदी कमीशन तय हो जाता है। उसके बाद ठेेकेदार लागत निकालने के बाद 10 प्रतिशत रकम अपने लिए भी बचाता है।
धन का अपव्यय
घुघली ब्लाक के भुवना ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सत्यानंद गुप्ता का कहना है कि उनके गांव के चौराहे पर विधायक निधि से हाईमास्ट लैंप लगा है। वह महीने भर जलने के बाद खराब हो गया। कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया राजेन्द्र यादव की भी है। घुघली ब्लाक के नेबुईयां ग्राम प्रधान घुरहू राजभर का कहना है कि लगने के कुछ दिनों तक हाईमास्ट जलता रहा। उसके बाद से खराब है।
क्या कहते हैं पूर्व विधायक
अवनीन्द्र नाथ उर्फ महंत दुबे
29 हाईमास्ट लगवाने का प्रस्ताव दिया था। कार्य भी कराया गया। रखरखाव के अभाव में अधिकतर खराब हैं। कुछ लाइट में तो अभी तक कनेक्शन ही चालू नहीं हो सका है। उनकी जिम्मेदारी सिर्फ लगवाने तक ही थी।
फतेह बहादुर सिंह
जितने भी हाईमास्ट लगाए गए थे, उनको चालू करा दिया गया था। रखरखाव और बिजली बिल का भुगतान करने के लिए ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दिया गया था। उसको ठीक रखने की जिम्मेदार ग्राम प्रधानों के ऊपर है।
विधायक निधि से लगे हाईमास्ट से लाभ जनता को मिलना चाहिए। अगर वे नहीं जल रहे हैं तो कार्यदायी संस्था को तलब किया जाएगा। अगर उनके स्तर से कोई गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. वेदपति मिश्र, सीडीओ
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