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अनुदान के इंतजार में बीत गई शादी

Maharajganj

Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। जिले में शादी अनुदान योजना का हाल ठीक नहीं है। बेटी के हाथ पीले करने के लिए आवेदन करने वाले गरीब विभाग का चक्कर लगाते-लगाते थक गए, लेकिन अनुदान नहीं मिला। कई तो अनुदान के इंतजार में किसी तरह कर्ज लेकर बेटी की शादी कर विदा भी कर चुके हैं। सबसे बुरी स्थिति सामान्य और पिछड़े वर्ग के आवेदकों की है। आवेदन करने वाले एक भी व्यक्ति को लाभान्वित नहीं किया जा सका है। हालांकि अनुसूचित जाति वर्ग में 1240 में से 447 आवेदकों को चेक मिल सका है।
केस नंबर एक
नगर पंचायत निचलौल के घोड़हवां वार्ड निवासी रसीद खां भूमिहीन हैं। साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी बेटी की शादी 19 अगस्त 2012 को होनी थी। उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में शादी अनुदान को लेकर एक अगस्त को आवेदन दिया। अनुदान नहीं मिलने के चलते उन्होंने कर्ज लेकर किसी तरह बेटी की शादी की। फार्म भरने और भागदौड़ करने में उनका करीब दो हजार रुपये जेब से खर्च हो गया। करीब छह बार जिला मुख्यालय स्थित आफिस का चक्कर काट चुके हैं।
दो
निचलौल ब्लाक के बैदौली गांव निवासी राजकुमार का पूरा कुनबा झोपड़ी के मकान में रहता है। वह मजदूरी करते हैं। 13 अप्रैल 2012 को बेटी की शादी तय थी। दो अप्रैल को अनुदान के लिए आवेदन पत्र जमा किया। इसमें करीब 1600 रुपये खर्च हो गए। फिर भी अनुदान नहीं मिला। महाजन से रुपये उधार लेकर किसी तरह शादी की। तहसील से लेकर जिले तक आठ बार दौड़ चुके हैं।
तीन
नगर पंचायत निचलौल के महाशय वार्ड निवासी अनुसूचित जाति की विधवा सावित्री देवी ने बेटी की शादी 16 मार्च 2012 को तय की थी। तीन मार्च को अनुदान के लिए आवेदन दिया। फार्म भरने के नाम पर 2000 रुपये खर्च हो गए, लेकिन अनुदान नहीं मिला। उसने जमीन गिरवी रखकर शादी की। वह 10 बार भागदौड़ कर चुकी है।
चार
निचलौल नगर पंचायत के मियां वार्ड निवासी हजरत अली के बेटी की शादी भी अनुदान के इंतजार में बीत गई। 15 जून 2012 को उन्होंने आवेदन किया। बेटी की शादी 20 जून को थी। फार्म भरने के नाम पर 1200 रुपये खर्च हो गए। अनुदान नहीं मिला तो शादी के लिए खेत गिरवी रखना पड़ा। वह तहसील से लेकर जिले तक 8-10 बार भागदौड़ कर चुके हैं।
पांच
नगर पंचायत निचलौल पांडेय वार्ड निवासी सुमित्रा के बिटिया की शादी 28 फरवरी 2011 में हुई है। उन्होंने अनुदान के लिए दो फरवरी को आवेदन किया। इस पर करीब एक हजार रुपये खर्च हो गए। लेकिन अभी तक अनुदान नहीं मिल सका। शादी में लिया कर्ज अभी तक भर रहे हैं।
इसी तरह सदर ब्लाक के दुबौली गांव निवासी विमला ने शादी अनुदान के लिए आवेदन किया, लेकिन रुपये नहीं मिले। बेटी के हाथ पीले करने के लिए 20 डिस्मिल खेत गिरवी रख दिया। सदर ब्लाक के ही रूधौली भावचक गांव निवासी देवेन्द्र सिंह ने भी शादी अनुदान के लिए आवेदन किया था। उनको भी अनुदान नहीं मिला। कर्ज लेकर शादी की। इसी तरह पहली बेटी की शादी में गिरवी रखा गया खेत आज तक नहीं छुड़ाया जा सका है।
कम बजट
शादी अनुदान के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के 254 लोगों ने आवेदन किया है, लेकिन सरकार ने पर्याप्त बजट मुहैया नहीं कराया है। 4.70 लाख रुपये मिले। इसके चलते 47 लोगों को ही अनुदान मिल सका। हालांकि विभाग ने 25.4 लाख रुपये की डिमांड शासन से की थी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रभात कुमार का कहना है कि शासन से धन मिलते ही सबको लाभान्वित किया जाएगा।
विकलांग हैं तो 15 हजार
सरकार ने विकलांगों की शादी को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान देने का प्राविधान किया है। दोनों के विकलांग रहने पर 20 हजार रुपये मिलते हैं। जबकि एक के विकलांग होने पर 15 हजार रुपये। इस योजना में आठ आवेदन आए हैं। सभी आवेदन लंबित हैं।
1817 आवेदन लंबित
अन्य पिछड़े वर्ग के 1817 लोगों ने शादी अनुदान का आवेदन दाखिल किया है। फिलहाल उनमें से किसी को लाभ नहीं मिल पाया है। हालांकि विभाग को शासन से 65.40 लाख रुपये मिल चुके हैं। उसके बावजूद अभी तक रकम लाभार्थियों के खाते में नहीं पहुंच सकी है। योजना के तहत आवेदन करने वाले अनुसूचित जाति के 1240 आवेदकों में से महज 447 व्यक्तियों को चेक मिल सका।
योजना के तहत 19 हजार तक सालाना आय वाले लोगों की बेटी की शादी के लिए 10 हजार रुपये अनुदान दिया जाता है। इसके लिए शादी के कार्ड के साथ आवेदन करना होता है।
कोट
हर वित्तीय वर्ष में शासन से शादी अनुदान मद में बजट की डिमांड की जाती है। बजट मिलने में देरी से क्रियान्वयन समय से नहीं हो पाता है। कई आवेदक शादी बीत जाने के बाद आवेदन करते हैं।
-केएम सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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