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जालसाज बेच रहे थे बीज सुधार फार्म

Maharajganj

Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
महराजगंज। जालसाज ने कारनामा दिखाते हुए डीएम का फर्जी हस्ताक्षर बनाकर बीज सुधार फार्म नटवां को गोरखपुर की एक महिला के नाम दर्ज करा दिया था। इसका खुलासा तब हुआ उस जमीन को बेचने का प्रयास शुरू कर दिया गया। सकते में आए प्रशासन के आदेश पर एसडीएम सदर ने कार्रवाई करते हुए उस जमीन को फिर से कृषि विभाग फार्म हाउस के नाम दर्ज करा दिया है।
बीज सुधार फार्म नटवां की 8.76 हेक्टेयर जमीन 23 दिसंबर 2001 को तत्कालीन डीएम के आदेश पर गोरखपुर जिले के अलहदादपुर निवासी ऊषा देवी के नाम कर दिया गया। जालसाज ने इसमें डीएम का फर्जी हस्ताक्षर किया था। महज एक पन्ने के दरख्वास्त पर आदेश कराकर पूरी कार्यवाही की गई। राजस्व विभाग के सभी अभिलेखों में इस जमीन पर महिला का नाम भी चढ़ा दिया गया। बाद में महिला की मौत हो गई तो उसके कथित पुत्र सैयद सज्जाद हुसैन और सैयद सद्दाम हुसैन उस जमीन को अपने नाम दर्ज कराने तथा बेचने का प्रयास करने लगे। यह मामला संज्ञान में आते ही कृषि विभाग सकते में आ गया। डीएम की पहल पर कृषि विभाग ने एसडीएम कोर्ट में अर्जी देकर दर्ज फर्जी नाम को निरस्त करने की मांग की। इसे स्वीकार करते हुए एसडीएम ने नाम को फर्जी तरीके से दर्ज बताकर खारिज कर दिया। अब जमीन फिर से बीज सुधार फार्म के नाम पर दर्ज हो गई। उसे खतौनी में भी चढ़वा दिया गया। अब विभाग उसी के आधार पर आगे की लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी रामकेवल ने बताया कि फार्म को फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज कराया गया था। इसे एसडीएम ने खारिज कर कृषि विभाग के पक्ष में मालिकाना हक कर दिया है।
कहां गए जालसाज
इस मामले में जालसाज कहां गए कोई बताते वाला नहीं है। देखा जाए तो इसमें लेखपाल के लेकर राजस्व विभाग के कई कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है, लेकिन इस बारे में प्रशासन ने कुछ नहीं किया। न तो जांच बैठाई गई है और न ही जालसाजों को पकड़ने के लिए कुछ किया गया है।
1960 में खरीदी गई थी जमीन
1960 में कृषि निदेशक लखनऊ के आदेश पर गोरखपुर निवासी बृजमोहन सहाय नामक व्यक्ति से यह जमीन 25,250 रुपये में खरीदी गई थी। तभी से उस जमीन पर बीज सुधार का काम होता चला आ रहा है। विभाग के बैलेंस सीट पर उस जमीन की चौहद्दी भी दर्ज है। वहां धान और गेहूं के बीज पैदावार होती है।
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