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गन्ने की मिठास हो रही फीकी

Maharajganj

Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
खुशहालनगर। गन्ना किसानों की उपेक्षा के चलते गन्ने की मिठास फीकी होती जा रही है। पहले किसानों को चीनी मिलों की गारंटी पर खाद और गन्ने का बीज कर्ज में उपलब्ध कराया जाता था। लेकिन यह पिछले चार साल से बंद है। इससे जिले में गन्ने की खेती कम होती जा रही है।
चीनी मिलों और केन यूनियन की आपसी सहमति से गन्ना विकास नीति तैयार की गई थी। इसके तहत केन यूनियन किसानों को कर्ज पर गन्ने का बीज और खाद उपलब्ध कराता था। कर्ज की कटौती मिलें किसानों को भुगतान देेते समय कर लेती थीं। गरीब किसानों को इससे काफी फायदा होता था। गन्ने की बुआई समय से हो जाती थी। इसके अलावा चीनी मिलें और केन यूनियन विकास कार्य भी मिलकर कराते थे। इसके तहत पुल, पुलिया और लिंग रोड का निर्माण कराया जाता था। मिलों की ओर से बनवाए गए सीसी रोड, लिंक मार्ग और पुलिया आज भी कायम हैं।
मेदिनीपुर गांव निवासी गन्ना किसान रामसुभग सिंह और परसौनी निवासी शंभूशरण सिंह का कहना है कि पहले केन यूनियन बोर्ड से प्रस्ताव पास कर प्रति किसान दो से तीन पैसे प्रति कुंतल की कटौती विकास के लिए करते थे। इससे एकत्रित रुपये से विकास के कार्य होते थे। पहले पासबुक दिखाकर खाद और बीज सस्ते कर्ज पर मिल जाते थे। लेकिन अब यह बातें पुरानी होती जा रही हैं।
इस संबंध में जिला गन्ना अधिकारी डॉ. राजेश धर द्विवेदी का कहना है कि गन्ना समितियां जिला सहकारी बैंकों से ऋण लेकर किसानों को खाद-बीज मुहैया कराती थीं। समितियां करोड़ों रुपये की देनदारी होने की वजह से घाटे में चली गईं। इससे मिलों ने उनको सहयोग देना बंद कर दिया। अब यह संभव नहीं रह गया है।
केन यूनियन घुघली के चेयरमैन शरद कुमार उर्फ बबलू सिंह का कहना है कि समितियों की हालत काफी खराब हो चुकी है। इससे किसानों को कर्ज पर खाद-बीज दिया जाना संभव नहीं है। नकद भुगतान करने पर खाद दी जा रही है। बीज वितरण की कोई व्यवस्था नहीं है।
1.15 करोड़ रुपये बकाया
गन्ना समितियों ने वर्ष 2008-09 से ऋण के रूप में खाद-बीज का वितरण बंद कर दिया है। समितियों का किसानों के जिम्मे करीब 1.15 करोड़ रुपये बकाया है। यह बकाया वर्ष 2003-04 से ही चल रहा है। हालांकि समिति हर साल किसानों के पर्ची भुगतान से कटौती का प्रस्ताव मिल के पास भेजती है, लेकिन किसान नाम बदलकर गन्ना सप्लाई कर देते हैं। इससे रिकवरी नहीं हो पा रही है।
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