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ठूठीबारी में बाढ़ का कहर

Maharajganj

Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
ठूठीबारी। नेपाल के पहाड़ों पर लगातार हुई बारिश ने महराजगंज जिले के मैदानी इलाके में कहर ढाना शुरू कर दिया है। बार-बार चेतावनी के बावजूद माकूल इंतजाम न होने से ठूठीबारी के लोग मुश्किल में हैं। यहां झरही नदी के पानी से कस्टम कार्यालय, एसएसबी कैंप और कोतवाली घिर गया है। वहीं घोला नाले ने कस्बे के दो टोलों को आगोश में ले लिया है। दोनों टोले पानी से घिर गए हैं। निचलौल-ठूठीबारी मार्ग पर चंदन पुल के पास पानी इतना बढ़ गया है कि इस रोड पर आवागमन बंद हो गया है।
कोतवाली से करीब 100 मीटर उत्तर नेपाल सीमा में झरही नदी ने कटान कर तबाही मचाई है। वहीं पहले से करीब 35 मीटर कटा घोला बंधा भी ठूठीबारी के दो टोलों पर कहर बरपा रहा है। सड़कों पर करीब दो फीट पानी बह रहा है। बहाव इतना तेज है कि एसएसबी, कस्टम और कोतवाली के जवान सहमे हुए हैं। एसएसबी कैंप में तो पूरी तरह से पानी घुस गया है। जवान अपना आशियाने और हथियार सुरक्षित करने में लगे हैं। गुरुवार को ये लोग अपना सामान समेटते रहे।
दो सप्ताह में तीसरी बार टूटा महाव तटबंध
परसामलिक/बरगदवा/सेवतरी/डगरु पुर। बरगदवां क्षेत्र के लोगों पर महाव का कहर जारी है। इस साल यह तटबंध तीसरी बार गुरुवार को बरगदवा के पास 50 मीटर टूट गया। छह और 13 जुलाई को भी यह टूट चुका है। दो सप्ताह के भीतर महाव के इस खौफनाक रूप से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है।
बरगदवा क्षेत्र के लोगों के लिए महाव तटबंध शोक साबित हो रहा है। जब नेपाल के पहाड़ोें पर पानी बरसता है तो सीधे महाव प्रभावित होता है। पानी के दबाव के चलते गुरुवार को महाव तटबंध इस साल तीसरी बार टूट गया। इससे पानी रिहायशी इलाकों में बढ़ने लगा है। खेतोें में पानी भर गया है। महाव तटबंध टूटने से बरगदवा, सगरहवा, दोगहरा, महरी और घोड़हवा गांव के लोग प्रभावित हुए हैं। तटबंधों की सूची में शामिल न होने के चलते इसके रखरखाव के प्रति जिला प्रशासन हर बार उदासीन बना रहता है। इस बार भी यही हुआ है। तटबंध टूटने के बाद इसे बनवाया जा रहा है, मगर कई जगह जर्जर बंधा टूट रहा है।
वैसे इसकी मरम्मत के नाम पर खर्च देखा जाए तो एक बार बंधा टूटन पर 50 हजार रुपये खर्च किया जाता है। पिछले तीन साल में यह बंधा 22 बार टूट चुका है। इस तरह इसकी मरम्मत के नाम पर 10 लाख रुपये से अधिक धन खर्च हो चुका है। प्रशासन अगर मानसून शुरू होने से पहले जर्जर बांध को ठीक करने का उपाय करे तो महाव के कहर को कुछ कम किया जा सकता है।
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