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कुपोषित बच्चों के इलाज को होंगे अलग डाक्टर

Lalitpur

Updated Wed, 22 Jan 2014 05:50 AM IST
ललितपुर। संयुक्त जिला चिकित्सालय सहित जनपद में संचालित सात पोषण पुनर्वास केंद्राें पर कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए अलग से डाक्टर मौजूद रहेंगे। इस संबंध में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन निदेशक ने संविदा के आधार पर डाक्टरों की तैनाती की अनुमति दे दी है।
कुपोषित बच्चों को पोषण देने के लिए प्रदेश में सबसे पहले ललितपुर जनपद में यूनीसेफ ने पायलेट प्रोजेक्ट के तहत संयुक्त जिला चिकित्सालय में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की थी। इस यूनिट में भर्ती होने वाले कुपोषित बच्चों को 15 दिन भर्ती रखकर पोषण देने का प्रावधान किया गया। इतना ही नहीं, कुपोषित बच्चों के साथ उनकी माताओं को किराया व भोजन की भी व्यवस्था की गई। जुलाई 2012 में इस योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत ललितपुर सहित पीलीभीत लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, महाराजगंज, उन्नाव, चित्रकूट, सोनभद्र, हरदोई, रायबरेली, कन्नौज, फर्रुखाबाद, प्रतापगढ़, गोंडा व बांदा जनपदों में संचालित करने का निर्णय लिया गया।
वहीं जनपद में संयुक्त जिला चिकित्सालय के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तालबेहट, महरौनी, मड़ावरा, जखौरा, बिरधा एवं बार में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई। आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं आशा कार्यकत्रियों को कुपोषित बच्चों को चिन्हित करके पुनर्वास केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इन केंद्रों पर आवश्यक संसाधन के साथ न्यूट्रिशियन, स्टाफ नर्स, केयर टेकर व रसोइया आदि संविदा स्टाफ की व्यवस्था की गई। कुपोषित बच्चों के इलाज का जिम्मा मुख्यालय स्तर पर संयुक्त जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर के चिकित्साधिकारियों को सौंपा गया। वर्ष 2013 नवंबर माह तक जनपद के सभी सात पोषण पुनर्वास केंद्रों पर शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के 602 कुपोषित बच्चों को पोषण दिया गया।
पृथक डाक्टरों की व्यवस्था न होने की वजह से पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती बच्चों के उपचार के लिए बाधा उत्पन्न हो रही थी। क्योंकि, जिला चिकित्सालय व सीएचसी पर तैनात चिकित्सकों को इन बच्चों के इलाज की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। कुपोषित बच्चों को सदैव चिकित्सक उपलब्ध रखने के लिए एनआरएचएम ने सभी पोषण पुनर्वास केंद्रों पर चिकित्सकों की तैनाती का निर्णय लिया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनआरएचएम ऋषिराज सिंह का कहना है कि शासन के दिशा निर्देशों के तहत जल्द ही डाक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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42 फीसदी बच्चों का वजन कम, सात फीसदी अति कुपोषित
ललितपुर। प्रदेश में कुपोषण एक गंभीर समस्या है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे तृतीय के अनुसार ‘3 वर्ष से कम उम्र के 42 प्रतिशत बच्चों का वजन अपनी उम्र के हिसाब से कम है और लगभग सात प्रतिशत बच्चे अति गंभीर रूप से कुपोषित हैं। कुपोषित बच्चों में मृत्यु की संभावना नौ गुना अधिक होती है।’ ऐसे हालातों में कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल व इलाज बेहद जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए एनआरएचएम के अंतर्गत पोषण पुनर्वास केंद्रों पर सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है।
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पोषण पुनर्वास केंद्रों का उद्देश्य
- पांच वर्ष तक के अति कुपोषित बच्चों की देखभाल
- अति कुपोषित बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाना
- शारीरिक एवं मनोसामाजिक वृद्धि को प्रोत्साहित करना।
- माताओं के व्यवहार में परिवर्तन की क्षमता विकसित करना।
- पोषण संबंधी समस्याओं व उनके समाधान को जागरूक करना।
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पोषण पुनर्वास केंद्र पर दी जाने वाली सेवाएं
- भर्ती किए गए कु पोषित बच्चों की 24 घंटे उचित देखभाल।
- बीमारी, जटिलताओं को जांच कर मानक के अनुरूप इलाज।
- उपचारात्मक आहार की निशुल्क व्यवस्था।
- मां व देखभाल करने वाले को खानपान, सफाई का परामर्श देना।
- कम लागत पर पोषण विधियां अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना।
- केंद्र में हर 15 दिन में दो माह तक चार बार फालोअप करना।
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बच्चों की पुनर्वास केंद्र से छुट्टी के मानक
- वजन में 15 फीसदी वृद्धि होने के बाद।
- बच्चों की भूख वापस आने के बाद।
- शरीर सूजन समाप्त हो जाने के बाद।
- बीमारी के समुचित उपचार के बाद।

जनपद के पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कुपोषित बच्चों की स्थिति
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संयुक्त जिला चिकित्सालय 123 बच्चे
सीएचसी तालबेहट 101 बच्चे
सीएचसी महरौनी 075 बच्चे
सीएचसी मड़ावरा 060 बच्चे
सीएचसी बार 086 बच्चे
पीएचसी बिरधा 075 बच्चे
सीएचसी जखौरा 082 बच्चे
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