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ओह हार्ट पेशेंट... झांसी रेफर

Lalitpur

Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। इसे शासन की उदासीनता कहें या जनपद वासियों का दुर्भाग्य कि मुख्यालय पर करोड़ों की लागत से निर्मित संयुक्त जिला चिकित्सालय में हृदय के गंभीर रोगियों के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टाफ के अभाव में यहां पर निर्मित आईसीयू सफेद हाथी साबित हो रहा है। हालात यह हैं कि उपचार की उम्मीद से आने वाले लगभग आधा सैकड़ा गंभीर मरीजों को प्रतिमाह झांसी मेडिकल कालेज रेफर किया जा रहा है।
इंसेंटिव केयर यूनिट (आईसीयू) किसी भी चिकित्सालय की सबसे महत्वपूर्ण यूनिट होती है, जहां हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को रखकर उनका उपचार किया जाता है। आईसीयू में सभी पलंग एक मॉनीटर से जुड़े होते हैं और चिकित्सक स्थिति के अनुसार उपचार करके उनकी जान बचाते हैं। लगभग बीस वर्ष पूर्व करोड़ों रुपये की लागत से संयुक्त जिला चिकित्सालय के निर्माण के साथ ही जिला अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक के बगल में आईसीयू का निर्माण कराया गया था, जिसमें तमाम संसाधन भी मुहैया कराए गए। लेकिन, स्टाफ के अभाव में उसे सुचारु नहीं बनाया जा सका। इसके बाद अस्पताल परिसर में नवनिर्मित ट्रामा सेंटर के बगल में नवीन आईसीयू कक्ष बनाया गया है, वह भी स्टाफ के अभाव में सुचारु नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि इस समस्या पर किसी भी जनप्रतिनिधि ने अब तक कोई रुचि नहीं दिखाई है, हालांकि आईसीयू की महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए अस्पताल प्रशासन पत्राचार करके प्रशासन को वस्तुस्थिति से लगातार अवगत कराता रहा है। बावजूद इसके, स्थिति जस की तस बनी हुई है। संयोग की बात यह है कि इस चिकित्सालय में एक दो नहीं, अपितु तीन वरिष्ठ फिजीशियन कार्य कर रहे हैं। वरिष्ठ फिजीशियन डा. अमित चतुर्वेदी ने बताया कि आईसीयू चालू न होने की वजह महीने में करीब 40 से 50 हृदय से संबंधित गंभीर रोगियों को झांसी मेडिकल कालेज रेफर करने के अलावा उनके समक्ष कोई दूसरा विकल्प नहीं रहता।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जनपद मुख्यालय पर ग्रामीण क्षेत्रों से ही नहीं, अपितु सीमावर्ती जनपद अशोकनगर अंतर्गत चंदेरी, सागर अंतर्गत बीना व टीकमगढ़ क्षेत्र के मरीज उपचार की उम्मीद लेकर संयुक्त जिला चिकित्सालय आते हैं। इन क्षेत्रों के हृदय रोगियों को जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद झांसी पहुंचने में सौ किलोमीटर सफर करना पड़ता है। इस सफर के दौरान कई मरीजों की रास्ते में ही मौत हो जाती है।




मुहैया नहीं ईसीजी की जांच
ललितपुर। दिल का दौरा पड़ने पर कोई मरीज संयुक्त जिला चिकित्सालय में उपचार कराने आ जाए तो उसकी ईसीजी जांच भी संभव नहीं है। जिला अस्पताल में पिछले आठ माह से ईसीजी की सुविधा ठप पड़ी है। कारण, यहां संविदा पर पदस्थ ईसीजी टेक्नीशियन का नवीनीकरण नहीं हो पाया है, नतीजतन मरीजों को निजी तौर पर ईसीजी कराने को बाध्य होना पड़ रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि चिकित्सक दिल के दौरे के दौरान मरीजों को हिलने डुलने से भी मना करते हैं, लेकिन अस्पताल में यह सुविधा न होने की वजह से तीमारदारों को उन्हें बाहर ले जाने का जोखिम उठाना पड़ रहा है।

कार्डियोलॉजी विभाग में भी तालाबंदी
ललितपुर। संयुक्त जिला चिकित्सालय स्थित कार्डियोलॉजी विभाग में ईसीजी मशीन, बेड साइड मोनीटर, डी फेब्रीलेटर मशीन, टीएमटी मशीन उपलब्ध हैं, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट न होने की वजह से मशीनें जहां धूल खा रही हैं, वहीं यूनिट तालाबंदी की शिकार है।


इनका कहना है-
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‘जिले में आईसीयू का अभाव अत्यंत गंभीर विषय है, इस संबंध में शासन से पत्राचार किया जा चुका है। लखनऊ स्तर पर उच्चाधिकारियों को दोबारा अवगत कराया जाएगा।’
डा. आरसी निरंजन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ललितपुर।


‘आईसीयू सुचारु रखने के लिए कार्डियोलाजिस्ट, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट एवं अन्य स्टाफ की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा समय में जिला चिकित्सालय में ही मानक के अनुरूप स्टाफ नहीं है। इस संबंध में शासन को भी अवगत कराया जा चुका है।’
डा. आरके सक्सेना
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
संयुक्त जिला चिकित्सालय ललितपुर।
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