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बिना टैक्स की टैक्सी में सफर कर रहे अफसर

Lalitpur

Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। सरकार के जिम्मेदार अफसर, जिनके कंधों पर नियम व कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी है, वह अपना हर कदम नियम को ताक पर रखकर चल रहे हैं। जी हां, जिले के सरकारी विभागों में अफसरों के लिए लगे वाहन बिना टैक्सी परमिट के हैं, जो संभागीय परिवहन विभाग के नियमों का खुला उल्लंघन हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि वर्षों से नियमों का उल्लंघन कर दौड़ रहे इन वाहनों के नियमों की पूर्ति पर न तो वाहन सवार अफसरों ने ध्यान देना जरूरी समझा और न ही संभागीय परिवहन विभाग ने, परिणाम स्वरूप विभाग को लाखों रुपये प्रतिवर्ष के राजस्व की हानि हो रही है।
दरअसल, संभागीय परिवहन विभाग 660 रुपये प्रति सीट प्रति त्रैमासिक के लिहाज से टैक्सी परमिट का शुल्क वाहन स्वामियों से वसूल करता है। इस तरह एक सीट का सालाना 2,640 रुपये विभाग को राजस्व प्राप्त होता है। चालक मिलाकर सात सीटर वाहनों का टैक्स 15,840 रुपये वाहन स्वामी वर्ष भर में जमा करते हैं। यह बिना एसी वाले वाहनों का टैक्स है। वातानुकूलित वाहनों को टैक्सी परमिट देते समय विभाग प्रति सीट 825 रुपये त्रैमासिक वसूल करता है। इस लिहजा से सात सीटर एसी टैक्सी परमिट वाहनों से विभाग को 23,100 रुपये सालाना आमदनी होती है। विभागीय नियमों के मुताबिक सरकारी और गैर सरकारी विभागों में अनुबंध पर लगने वाले वाहन टैक्सी परमिट के होने चाहिए। गैर सरकारी संगठन तो इन नियमों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन जनपद स्थित सरकारी महकमे भी संभागीय परिवहन विभाग के नियमों को कई वर्षों से धता बताने में जुटे हैं। राम गंगा कमांड, भूमि संरक्षण विभाग, जल निगम, लघु सिंचाई, जल संस्थान, सिंचाई विभाग के विभिन्न निर्माण खंड कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला पंचायत सहित विभिन्न कार्यालयों में अधिकारियों के भ्रमण आदि के लिए लगाए गए चार पहिया वाहन बिना टैक्सी परमिट के अनुबंधित किए गये हैं। अफसरों की अनदेखी के कारण वाहन स्वामी टैक्सी परमिट पर पैसा खर्च करना मुनासिब नहीं समझते और निजी वाहनों से व्यवसायिक गतिविधियों को अंजाम देते चले आ रहे हैं। इन हालातों में संभागीय परिवहन विभाग को सालाना लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह बात और है कि अभी तक संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों ने भी इस नुकसान की भरपाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
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