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संयुक्त विकास आयुक्त को धन देने पर जताई आपत्ति

Lalitpur

Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
ललितपुर। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत प्रशासनिक मद में जनपदों को दी जाने वाली धनराशि के खर्च पर कैग ने आपत्ति दर्ज की है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक टीम ने मनरेगा के जनपद प्रशासनिक मद से मंडल मुख्यालय में बैठने वाले संयुक्त विकास आयुक्त को धनराशि दिए जाने पर लिखित तौर पर ऐतराज जताया है।
ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार देने के लिए संचालित की गई महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत हर वर्ष केंद्र सरकार हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है। ग्राम पंचायतों से शुरू हुई इस योजना के धन का उपयोग विभिन्न विभाग श्रमांश के रूप में करने लगे। वित्तीय वर्ष 2012- 13 के तहत योजना संचालन में उपयोग किए जा रहे धन की जांच करने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की टीम ने सूबे के जालौन, चित्रकूट, सुल्तानपुर सहित कुल 18 जनपदों में डेरा डाला और खर्च से संबंधित लेखाजोखा का सघन परीक्षण किया। जांच में मनरेगा की प्रशासनिक मद में दी जाने वाली धनराशि का गलत ढंग से इस्तेमाल होते हुए पाया गया। प्रत्येक योजना में शासन जनपदस्तर पर धन निर्गत करता है, पर मनरेगा में जिले से मंडलस्तरीय अधिकारियों को धन भेजे जाने की परंपरा फल फूल रही थी। जनपद जालौन में मनरेगा की जनपद प्रशासनिक मद से मंडल में बैठने वाले संयुक्त विकास आयुक्त को हर वर्ष धन देने पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने कड़ी आपत्ति जताई। ललितपुर में भी मनरेगा की जनपद प्रशासनिक मद से संयुक्त विकास आयुक्त को धनराशि दी जाती रही है। लेकिन, जालौन में कैग की आपत्ति से विभागीय आला अधिकारी हरकत में आ गए हैं। आला अधिकारियों को धनराशि देने से अफसरों ने साफ इनकार तो नहीं किया पर वे अब संयुक्त विकास आयुक्त को धनराशि देने से कन्नी काट रहे हैं। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस आपत्ति को लेकर शासन दिशा निर्देश जारी करेगा।


शासन से दिया जाए धन
ललितपुर। विभाग के कुछ अफसरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नीचे स्तर से धन ऊपर जाना रंगदारी जैसा ही लगता है। कायदे से शासन को इस संबंध में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए और शासनस्तर से ही आला अधिकारियों के लिए धन निर्गत किया जाना चाहिए।
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