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पेयजल संकट दूर करने को 53 लाख

Lalitpur

Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। नगर सीमा के अंदर अनुसूचित जाति जनजाति बाहुल्य इलाकों में व्याप्त पेयजल संकट अब जल्द दूर हो सकेगा। शासन ने ऐसे क्षेत्रों में नये हैंडपंप लगाने, मरम्मत करने तथा रीबोर होने वाले नलकूपों को दुरुस्त करने के लिए दिशा निर्देश देते हुए तिरेपन लाख रुपये जल निगम को जारी कर दिए हैं। विभागीय अधिकारी योजना बनाने में जुट गए हैं।
समाजवादी पार्टी सरकार का ध्यान ग्रामीण इलाकों की पेयजल समस्या पर केंद्रित हो गया था, ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप लगाए गए और शासन ने इस कार्य के लिए लगातार धनराशि भी जारी की। इस दौरान नगरीय इलाकों की पेयजल समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। नगर सीमा के भीतर महावीरपुरा, चौबयाना, नेहरू नगर, नई बस्ती, गांधी नगर सहित विभिन्न अनुसूचित जाति जनजाति बाहुल्य (मलिन बस्ती) क्षेत्र में पेयजल समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया। सरकारी नलों की टोटियों से पानी नहीं आने के कारण तमाम लोग दूर दराज के हैंडपंपों से पानी भरने को मजबूर हैं। शासन स्तर पर आयोजित बैठक के दौरान इस मुद्दे को अफसरों ने उठाया और गंभीरता के साथ चरचा भी हुई। इस समस्या को दूर करने के लिए शासन ने जल निगम को तिरेपन लाख रुपये जारी किए हैं। शासन ने यह भी निर्देश दिया है कि उक्त धनराशि अनुसूचित जाति जनजाति बाहुल्य बस्तियों के आसपास नये हैंडपंप लगाने, पुराने हैंडपंपों की मरम्मत करने पर खर्च किए जाएं। यही नहीं खराब पड़े नलकूपों को भी रीबोर करने के निर्देश आला अधिकारियों ने दिए हैं। धनराशि मिलने के पश्चात जल निगम अधिकारियों ने सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। समस्याग्रस्त स्थानों की सूची तैयार करके जिलाधिकारी से हैंडपंप लगाने व मरम्मत करने का अनुमोदन जल निगम अफसरों लेंगे, तब हैंडपंप लगाया जाएगा।


अन्य इलाकों को 17 लाख
ललितपुर। नगर में अनुसूचित जाति जनजाति बाहुल्य इलाकों के अलावा अन्य क्षेत्रों का भी शासन ने ख्याल रखा है। समान्य वर्ग की बस्तियों में नए हैंडपंप लगाने, पुराने हैंडपंपों की मरम्मत करने के साथ नलकूपों को दुरुस्त करने के लिए शासन ने जल निगम को सत्रह लाख पचहत्तर हजार रुपये जारी किए गए हैं। उक्त क्षेत्रों में हैंडपंपों की स्थिति का जायजा विभागीय अधिकारी ले रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुमोदन पर पेयजल संबंधी कार्य कराए जाएंगे। लेकिन, जानकार इस धनराशि को ऊंट के मुंह में जीरा मानकर चल रहे हैं।
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