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भाजपा के दोबारा अध्यक्ष बने प्रदीप चौबे

Lalitpur

Updated Sat, 10 Nov 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। भारतीय जनता पार्टी के जिलास्तरीय संगठनात्मक चुनाव में प्रदीप चौबे दोबारा अध्यक्ष चुन लिए गए। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी धर्मेंद्र पाठक को बारह मतों से शिकस्त देकर आसान जीत दर्ज की। तत्पश्चात समर्थकों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया।
श्री वर्णी कालेज के पास स्थित गुरुनानक धर्मशाला में सुबह से ही कार्यकर्ताओं का पहुंचना प्रारंभ हो गया था। सुबह करीब दस बजे विभाग संगठन मंत्री सत्यप्रकाश, चुनाव अधिकारी रामनरेश अगिभनहोत्री व सहायक चुनाव अधिकारी अरिदमन सिंह पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले चुनाव कार्यक्रम व मतदाताओं की सूची चस्पा कराई। जैसे ही नामांकन का समय करीब आने लगा, वैसे ही कार्यकर्ताओं में चुनाव को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई। दोपहर करीब बारह बजे तक कार्यकर्ताओं में आपसी सहमति बनाने के प्रयास होते रहे लेकिन, ज्यादातर कार्यकर्ता चुनाव कराने के पक्ष में दिखाई दिए। दावेदारों में आपसी सहमति नहीं बनते देख नामांकन पत्र दाखिल करने का मन बना लिया। निर्धारित समय तक अध्यक्ष पद के लिए चार कार्यकर्ताओं ने नामांकन पत्र जमा किए, इनमें प्रदीप चौबे, धर्मेंद्र पाठक, कर्नल राजेंद्र सिंह, सालिकराम पुरोहित शामिल रहे। जांच के दौरान पर्याप्त प्रस्तावक व समर्थक नहीं होने पर सालिकराम पुरोहित का पर्चा निरस्त कर दिया गया। इसी तरह की कमी के चलते अनुसूचित जाति के कोटे में प्रदेश परिषद सदस्य के लिए दाखिल किया गया प्रदीप खटीक का पर्चा निरस्त किया गया। इस तरह मनोहरलाल पंथ को प्रदेश परिषद का सदस्य चुन लिया गया। हालांकि सालिकराम पुरोहित ने पर्चा निरस्त होने के पूर्व ही चुनाव प्रक्रिया के बदलाव पर असंतोष जाहिर किया। यही नहीं, उन्होंने प्रक्रिया में बदलाव की पूर्व सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर संगठन मंत्री को कठघरे में खड़ा किया। नामांकन पत्रों की जांच उपरांत दोबारा सहमति बनाने की कोशिशें होती रही। इसी कड़ी में कर्नल राजेंद्र सिंह ने अपना पर्चा वापस ले लिया। लेकिन, धर्मेंद्र पाठक व उनके समर्थक चुनाव के लिए अड़े रहे। नाम वापसी का समय निकलने के बाद मतदान शुरू हुआ। इस दौरान कुल 26 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया। मतों की गणना में प्रदीप चौबे को 19 मत हासिल हुए जबकि प्रतिद्वंदी धर्मेंद्र पाठक को मात्र 7 वोट मिले। इस तरह प्रदीप चौबे अध्यक्ष पर दोबारा काबिज हो गए। परिणाम घोषित होते ही समर्थकों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें तिलक लगाकर व फूलमालाओं से लाद स्वागत किया। इस मौके पर पूर्व विधायक देवेंद्र सिंह, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, प्रेमचंद्र पटेल, अशोक गोस्वामी, हरीराम निरंजन, धर्मेंद्र गोस्वामी, राजकुमार चूना, बब्बूराजा बुंदेला, देवेंद्र गुरू, भगवतदयाल सिंधी, केशवदास शर्मा, हरनारायण शर्मा, राजेश त्रिपाठी, गुड्डू अगिभनहोत्री, ठा.महेंद्र सिंह, उमाशंकर भोड़ेले, जीएस परिहार, धर्मेंद्र दुबे, दिनेश नायक, हरीशंकर सोनी, सौरभ सिंह, शिवशरण शुक्ला, रघुवीर तिवारी, भगवत सिंह चौहान, पवन कौशिक, जगदीश सोनी, महेंद्र सविता, अमित तिवारी, चंद्रेशखर दुबे, प्रदीप खटीक, मनोहर लाल पंथ, शालिकराम पुरोहित, सुरेश प्रकाश कोते, सुरेश टोंटे, मनोज कुमार सोनी मज्जू, देवेंद्र डिस्को, राहुल मोदी आदि उपस्थित रहे।


चुनाव प्रक्रिया में बदलाव बनी पेचीदगी
ललितपुर। जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश परिषद सदस्य के चुनाव में प्रत्येक दावेदार को अलग-अलग मंडल के पांच प्रस्तावक व इतने ही समर्थकों की आवश्यकता थी। इस बदलाव का खामियाजा पूर्व जिलाध्यक्ष सालिकराम पुरोहित व प्रदीप खटीक को भुगतना पड़ा, वे पर्याप्त संख्या में प्रस्तावक नहीं जुटा सके। इसके चलते उनका पर्चा खारिज कर दिया गया।


रास नहीं आया प्रक्रिया में बदलाव
ललितपुर। स्थानीय संगठनात्मक चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए प्रक्रिया में किए गए बदलाव चुनाव के दौरान दावेदारों को रास नहीं आए। पूर्व जिलाध्यक्ष सालिकराम पुरोहित ने इस बदलाव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने चुनाव अधिकारियों व विभाग संगठन मंत्री पर कार्यकर्ताओं को अंधेरे में रखने का आरोप लगाया, उनका तर्क था कि इस बदलाव की सूचना पहले से समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई जानी थी। ऐन वक्त पर इस बदलाव की जानकारी देने से कई दावेदार अपने प्रस्तावक नहीं ढूंढ सके।


अनुशासन हुआ तार-तार
ललितपुर। अनुशासित कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी का अनुशासन चुनाव के दौरान कई बार तार-तार होते दिखा। पूर्व जिलाध्यक्ष के समर्थकों ने विभाग संगठन मंत्री के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके पश्चात उन्होंने अध्यक्ष के एक दावेदार पर गंभीर आरोप लगाया, उनका आरोप था कि होटल में मतदाताओं को बंधक बनाकर रखा गया है। इस वजह से दूसरे दावेदारों को प्रस्तावक नहीं मिल पाए। जिस समय आम सहमति के प्रयास चल रहे थे, उसी दौरान एक दावेदार की एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के साथ कहासुनी हो गई। महत्वपूर्ण बात यह रही कि चुनाव अधिकारी चुपचाप यह सब देखते रहे। एक चुनाव अधिकारी का धैर्य जवाब दे गया, उन्होंने यहां तक कह डाला कि इस तरह के हालातों से प्रदेश में क्या संदेश जाएगा?
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