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वकीलों के चैंबरों में बुनियादी सुविधाओं का टोटा

Lalitpur

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। कचहरी परिसर में वकीलों के लिए आवंटित चैंबरों में बुनियादी सुविधाओं का टोटा है, जिसके चलते चैंबर आवंटित होने के बाद भी अधिकांश अधिवक्ता खुले आसमान तले प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं।
पिछले शासनकाल में समाजवादी पार्टी की सरकार ने अधिवक्ताओं के हित में कचहरी परिसर में सौ चैंबर का निर्माण कराया था, चैंबरों का निर्माण पूरा ही नहीं हो पाया था कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया, जिसके बाद तत्कालीन सरकार ने चैंबर निर्माण के लिए आवंटित की गई धनराशि के खर्च हुए भाग को छोड़कर शेष धनराशि वापस ले ली, नतीजतन अधिवक्ताओं के लिए चैंबरों का निर्माण तो हो गया, लेकिन उनमें मूलभूत सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। चैंबरों में न तो पीने के लिए पानी की कोई व्यवस्था है न ही बाथरुम की। ब्लॉक ए में जहां लेट्रिंग बाथरूम बने ही नहीं हैं, वहीं ब्लॉक बी में अधूरे पड़े हुए हैं। मौजूदा समय में पचास-पचास चैंबर वरिष्ठता के आधार पर अधिवक्ताओं को आवंटित कर दिए गए हैं, जिसमें अधिकांश अधिवक्ताओं ने अपने खर्चे पर पंखे व लाइट लगवाई है। ब्लाकों की साफ- सफाई भगवान भरोसे है, मुख्य दरवाजे टूटे हुए हैं, जिससे रैंप पर चढ़कर आवारा जानवर भी वकीलों के चैंबरों तक पहुंच जाते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक रिछारिया का कहना है कि ब्लाकों में बने रैम्प हटवाने के लिए संबंधित अधिकारियों से मांग की गई है, लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।
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नियुक्त किया जाए सफाई कर्मी
‘दोनों ब्लॉकों की साफ सफाई न होने से अधिवक्ता अपने-अपने चैम्बरों में बैठने से कतराते हैं। नगर पालिका को यहां एक सफाई कर्मचारी नियुक्त करना चाहिए, ताकि ब्लाकों में नियमित सफाई होती रहे।’
राधा बल्लभ करौलिया, अधिवक्ता
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पेयजल को भटकते वकील
‘ब्लाकों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। अधिवक्ताओं को पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। गर्मियों में स्थिति गंभीर हो जाती है, जब वकील काला कोट पहनकर काम करते हैं।’
अशोक रिछारिया, वरिष्ठ अधिवक्ता
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चैंबर से वंचित हैं कई वकील
‘चैंबर की संख्या अधिवक्ताओं की संख्या से काफी कम है। इस कारण अनेक अधिवक्ता चैंबर से वंचित रह गए हैं, उन्हें मजबूर होकर अपना बस्ता बाहर लगाना पड़ रहा है’
संतोष कुमार गोयल, वरिष्ठ अधिवक्ता
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नहीं है स्थायी वाहन स्टैंड
‘कचहरी परिसर में स्थायी वाहन स्टैंड की व्यवस्था नहीं है, जिससे अधिवक्ताओं को वाहन रखने संबंधी समस्या उत्पन्न होती है। इसके अलावा चैंबरों में सुविधाओं का अभाव है, यदि वे पूरी होती तो अधिवक्ता अपने चैंबरों में बैठकर ही वकालत करते।’
जयकुमार समैया, वरिष्ठ अधिवक्ता
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