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गैस के दाम बढ़ते ही वैकल्पिक ईधन की तलाश शुरू

Lalitpur

Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। रसोई गैस की कीमतें आसमान छूने से उपभोक्ता वैकल्पिक ईधन की तलाश में जुट गए हैं। बाजारों में खाना पकाने वाले इलेक्ट्रानिक आइटम व केरोसिन उपकरणों की मांग बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर लोगों को केरोसिन के चूल्हों की याद आने लगी है।
चौबे मार्केट के इलेक्ट्रानिक्स व्यापारियों का कहना है कि रसोई गैस की कीमतें बढ़ने से लोग हीटर व इंडेक्शन कुकर की खरीददारी कर रहे हैं, इनकी मांग बढ़ने से बाजार में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अनेक लोगों ने इन उपकरणों की बुकिंग भी करा ली है, जिससे आगे उन्हें महंगे दामों में न खरीदना पड़े । व्यापारियों ने उपभोक्ताओं की मांग को दृष्टिगत रखते हुए कंपनियों को दस गुना बढ़ाकर आपूर्ति करने का आर्डर दे दिया है, वहीं घंटाघर क्षेत्र के दुकानदारों ने बताया कि गैस की किल्लत को देखते हुए लोग केरोसिन वाले चूल्हे खरीदना पसंद कर रहे हैं। इसके पूर्व केरोसिन के चूल्हों की बिक्री ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों तक ही सीमित थी, जिससे इन चूल्हों का व्यापार घट गया था, लेकिन अब शहरी इलाकों में ब्रांडेड कंपनियों के केरोसिन चूल्हों की मांग बढ़ गई है।

लकड़ी जलाकर हो रहे भंडारे
गैस की कीमतों का असर नवदुर्गा महोत्सव पर भी पड़ रहा है। शहर में एक सैकड़ा से अधिक स्थानों पर विराजी मां के दरबारों में भी गैस के स्थान पर लकड़ी की भट्टी पर भंडारे का सामान तैयार किया जा रहा है। समितियों के पदाधिकारियों का कहना है कि जब गैस सस्ती थी, तो श्रद्धालु घरों से गैस सिलेंडर उठाकर भंडारे में लगा देते थे, लेकिन इस बार लोगों को जब तीन ही सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर मिलने हैं, तो सिलेंडर लाने में किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई।



मिड डे मील भी होगा प्रभावित
रसोई गैस की मूल्य वृद्धि का असर गृहणियों के अलावा मिड-डे मील पर भी पड़ रहा है। शहरी इलाकों में प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में अध्यापकाें की देखरेख में रसोइया खाना पकाते हैं। पहले तो गैस सिलेंडर चार सौ रुपये में मिल जाया करता था, लेकिन अब उसकी कीमत एक हजार रुपये से भी अधिक हो गई है, जिससे मिड-डे मील भी प्रभावित होती नजर आ रही है। गैस की महंगाई ने मिड-डे मील में फिर से लकड़ी का प्रयोग करने को मजबूर कर दिया है।
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