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स्वकर: शासन ने नपा अध्यक्ष व पार्षदों के कतरे पर

Lalitpur

Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष व पार्षद स्वकर प्रणाली के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की दखलंदाजी नहीं कर सकेंगे। शासन ने पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए नई प्रक्रिया को सरलता से अमली जामा पहनाने के लिए टैक्स कमेटी की व्यवस्था समाप्त करके अधिशासी अधिकारी को स्वकर निर्धारण अधिकारी बना दिया है।
प्रदेश की विभिन्न नगर निगमों में स्वकर प्रणाली लागू करने के दौरान विभागीय अफसरों को तमाम पापड़ बेलने पड़े थे। मेयर सहित पार्षदों ने इस प्रणाली का विरोध किया और सदन में इस व्यवस्था को खारिज करके प्रस्ताव शासन को वापस भेज दिया, हालांकि बाद में शासन ने सख्ती इसे लागू करवाया। इस विरोध के पीछे जनप्रतिनिधियों की टैक्स कमेटी प्रमुख वजह थी। हर पांच वर्ष बाद गृहकर को लेकर होने वाले सर्वेक्षण में नगर निकाय कर्मचारी भवनों में हुए परिवर्तन के आधार पर नया टैक्स रोपित करके नोटिस जारी करते हैं। इसके बाद सर्वाधिकार रखने वाली टैक्स कमेटी भवन स्वामियों की आपत्तियों को सुनती है। कमेटी में नामित जनप्रतिनिधि आपसदारी निभाते हुए 500 से 1,000 रुपये तक निर्धारित किए गए गृहकर को महज 505 रुपये में तब्दील कर देते हैं।
यह रियायत वोटों में तो तब्दील होती रही पर विभाग का खजाना कंगाल होता रहा। नगर पालिका परिषद में भी यह रवायत जारी रही। इन हालातों को ध्यान में रखकर शासन ने स्वकर प्रणाली में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को ही समाप्त कर दिया। यहां तक कि नगर पालिका परिषद बोर्ड भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। शासन ने पालिका परिषद अधिशासी अधिकारी को कर निर्धारण अधिकारी बनाकर टैक्स से संबंधित सभी अधिकार सौंप दिए गए हैं, अब जनता की आपत्तियों को भी वे ही सुनेंगे और समस्या का निस्तारण भी करेंगे। जानकारों का कहना है कि स्वकर प्रणाली लागू हो जाने से भवन स्वामियों को खुद अपने आवास के गृहकर निर्धारण का अधिकार मिल जाएगा। द्वेष भावना के तहत जिन भवनों का गृहकर बढ़ाया गया स्वकर में उनको राहत मिल जाएगी।


ऐसे लगेगा स्वकर
ललितपुर। स्वकर के तहत भवन के कुल कवर्ड एरिया से उसका बीस फीसदी क्षेत्रफल किचिन, पूजा घर, बाथरूम, पोर्टिको, सीढ़ियां व खुले आंगन का हिस्सा मानकर हटा दिया जाएगा। शेष अस्सी फीसदी क्षेत्रफल का निर्धारित सर्किल रेट से गुणा करके भवन की कुल वैल्यू निकाली जाएगी। इसके बाद आने वाली वैल्यू का दस फीसदी स्वकर माना जाएगा। स्वकर लागू करने के लिए नगर पालिका परिषद एक पत्रिका प्रकाशित करेगी, इसमें स्वकर निर्धारण के सभी नियम कानून के साथ इसका एक फार्म भी मौजूद रहेगा। यह पत्रिका भवन स्वामियों को वितरित की जाएगी।
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