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पिछड़ रही ‘आशीर्वाद’ बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना

Lalitpur

Updated Sun, 21 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत आयुष चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम एवं पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया अटकने से मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल ‘आशीर्वाद’ बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना पिछड़ती नज़र आ रही है, क्योंकि योजना के मुताबिक जिन चयनित संविदा चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्रों के बालकों के स्वास्थ्य परीक्षण में जुटना था, वे विभाग में अपनी ज्वाइनिंग की बाट जोह रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले दो से सोलह वर्ष तक के सभी बच्चों को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से एनआरएचएम आगामी चौदह नवंबर से ‘आशीर्वाद’ बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना लागू करने जा रही है, जिसे सुचारु रखने के लिए पिछले सप्ताह आवश्यक स्टाफ की संविदा पर तैनाती के लिए जिलाधिकारी द्वारा गठित टीम के जरिए भर्ती प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन गाेंडा जनपद में संविदा स्टाफ की भर्ती को लेकर राज्यमंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह द्वारा सीएमओ को घर से उठाए जाने की घटना के बाद शासन ने संविदा स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को यथास्थिति में रखने के निर्देश जारी कर दिए। जनपद में तभी से संविदा स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई, जबकि ‘आशीर्वाद’ बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के मुताबिक स्टाफ की इस भर्ती प्रक्रिया को पंद्रह अक्टूबर तक पूर्ण करके चयनित स्टाफ को जनपद स्तर पर उनके प्रशिक्षण के उपरांत ब्लाक स्तर पर योजना के क्रियान्वयन को पहुंच जाना चाहिए था। योजना के अनुसार प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर दो मेडिकल टीमें तैनात की जानी हैं। प्रथम टीम में एक संविदा चिकित्सक रहेगा, जिसमें एमबीबीएस चिकित्सक को प्राथमिकता दी जानी है। एमबीबीएस उपलब्ध न होने की स्थिति में दंत चिकित्सक (बीडीएस) को तैनात किया जाना है। दूसरी टीम में आयुष का एक चिकित्सक तथा प्रत्येक टीम में एक पराचिकित्सक, महिला नर्सिंग स्टाफ, एएनएम एवं एक पैरामेडिकल कर्मी तैनात किया जाना जरूरी है। योजना के पहले चरण में जनपद के विभिन्न सरकारी स्कूलों के एक लाख नब्बे हजार नौ सौ इकसठ बच्चे चयनित भी कर लिए गए है, जिनमें चौरनवे हजार छह सौ अठहत्तर लड़के एवं छियानवे हजार दो सौ तिरासी लड़कियां हैं, जिनक ा स्वास्थ्य परीक्षण कार्य प्रारंभ हो जाना चाहिए था, लेकिन संविदा स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया अटकने से शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है।
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