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अधिकांश समितियों ने खर्च नहीं किया पिछले वर्ष का बजट

Lalitpur

Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। ग्राम पंचायत स्तर पर गठित स्वच्छता एवं पोषण समितियां ग्रामीण जनता की सेहत के प्रति उदासीन हैं, यही कारण है कि अधिकांश समितियां पिछले वर्ष दिया गया बजट खर्च नहीं कर पाई हैं। पिछली राशि व्यय न होने के कारण मौजूदा वित्तीय वर्ष में जारी धन समितियों के खातों में स्थानांतरित नहीं हो पा रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता एवं पोषण समितियां गठित की गईं हैं, इनको संचालित करने के लिए ग्राम प्रधान एवं एएनएम का संयुक्त खाता खुलवाया जाता है। जनपद की तीन सौ चालीस ग्राम पंचायत में रहने वाले ग्रामीणों को बीमारियों से बचाने एवं कुपोषित बच्चों को पोषण मुहैया कराने के उद्देश्य से प्रत्येक ग्राम पंचायत को हर वर्ष दस हजार रुपये धनराशि आवंटित की जाती है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर संचालित समितियों की उदासीनता का आलम यह है कि अधिकांश समितियों ने पिछले वर्ष दी गई धनराशि का सदुपयोग न करके उसे डंप कर रखा है, जिसके चलतेे ग्रामीण क्षेत्र की जनता को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि बरसात के बाद जनपद के ग्रामीण इलाकों में संक्रामक बीमारियों ने जमकर कहर बरपाया। विभिन्न ग्राम पंचायतों में उल्टी व दस्त से लगभग आधा दर्जन ग्रामीणों की मौत भी हो चुकी है, वहीं संक्रामक रोग नियंत्रण टीम नेे ग्रामीण क्षेत्रों में डेरा डालकर सैकड़ों की संख्या में मरीजों का उपचार किया है। लापरवाही की बात यह भी कि समितियों ने पिछले वर्ष जारी किए धनराशि का सही ब्यौरा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को मुहैया नहीं कराया है, जिसके चलते मौजूदा वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायत को दी जाने वाली धनराशि खातों में स्थानांतरित नहीं हो पाई है। इस उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए पिछले दिनों झांसी में हुई समीक्षा बैठक के दौरान मंडलायुक्त झांसी ने संबंधित अफसरों को जमकर फटकार भी लगाई थी, इसके बाद विभागीय अफसर समितियों के पिछले वर्ष के व्यय का लेखाजोखा एकत्र करने में जुट गए हैं।



एनआरएचएम ने किए परिवर्तन
ललितपुर। पिछली सरकार में एनआरएचएम घोटाले से सबक लेते हुए शासन ने इस वर्ष ग्राम पंचायत स्तर पर गठित समितियों को दी जाने वाली धनराशि में व्यापक परिवर्तन कर दिया है। पहले प्रत्येक राजस्व ग्राम को दस हजार रुपये का बजट जारी किया जाता है, मसलन यदि किसी ग्राम पंचायत में दस राजस्व ग्राम हैं तो उसे एक लाख रुपये धनराशि आवंटित की जाती थी, लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में हर ग्राम पंचायत को दस हजार रुपये की दर से भुगतान किया गया है। इसके अलावा यह शासनादेश भी जारी किया गया है कि जिस ग्राम पंचायत ने पिछले वर्ष पांच हजार रुपये व्यय कर लिया है, तो उसे पांच हजार रुपये का बजट ही अवमुक्त किया जाए, लेकिन व्यय का ब्योरा न मिलने से सही स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

ग्राम प्रधान व एएनएम में नहीं समन्वय
ललितपुर। ग्राम पंचायत स्तर पर गठित स्वच्छता एवं पोषण समितियों की धनराशि व्यय न होने का महत्वपूर्ण कारण संबंधित क्षेत्र के ग्राम प्रधान एवं एएनएम के बीच समन्वय का न होना भी है। किन्हीं कारणों के चलते दोनों के बीच मतभेद के कारण ग्रामीणों की सुविधा के लिए जारी होने वाली धनराशि समितियों के खातों डंप पड़ी रहती है, समितियों के खाते संयुक्त होते हैं और दोनों की सहमति पर ही धनराशि का आहरण होता है।

विभागीय अफसर भी हैं जिम्मेवार
ललितपुर। स्वच्छता एवं पोषण समितियों को ग्रामीण जनता के हित में कार्य करने को प्रेरित करने का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का है। नियमत: संबंधित अफसरों को समय समय पर ग्राम स्तर पर बैठकों आयोजित करके समितियों के साथ ग्रामीण जनता को भी इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीक़त यह है कि संबंधित अफसर मुख्यालय पर बैठकर ही जागरुकता संबंधी बैठकों की खानापूर्ति कर लेते हैं।
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