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महावीर सेंचुरी के पास की पत्थरों खदानों पर संकट

Lalitpur

Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। देवगढ़ स्थित महावीर वन्य जीव विहार के दस किलोमीटर के दायरे में संचालित खदानों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इको सेंस्टिव जोन के रूप में घोषित इस सीमा के अंदर खनन करने के लिए भारत सरकार की अनुमति आवश्यक कर दी गई है। इस नियम के पालन को प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव उत्तर प्रदेश ने खनन विभाग को पत्र लिखा है। इससे खनन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
ललितपुर जनपद स्थित देवगढ़ ग्राम सभा के पास महावीर वन्य जीव बिहार 1,241 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसके आसपास जमीन के अंदर अच्छे किस्म का सेंड स्टोन और ग्रेनाइट पाया जाता है। मौजूदा समय में सेंड स्टोन की अट्ठासी, ग्रेनाइट की सैंतीस, खंड, गिट्टी व बोल्डर की चवालीस, बालू की आठ, डायस फोर व पायरोफिलाइट की आठ खदाने संचालित हैं। इन खदानों से उक्त खनिज निकालकर बाजार में बेचा जाता है, इसके सापेक्ष खनन विभाग को रायल्टी अदा की जाती है। खनन विभाग को इस कारोबार से सालाना 15 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। हाल ही में वन्य जीव विहार को बचाए रखने के लिए इसके आसपास इको सेंस्टिव जोन बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई, इसमें अब तेजी आ गई है। वन्य जीव विहार के एक किलोमीटर दायरे में खनन को प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं, दस किलोमीटर दायरे में खनन के लिए भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति आवश्यक कर दी गई है। प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव उत्तर प्रदेश बी के पटनायक ने जिलाधिकारी व खनन अधिकारी को पत्र लिखकर इस नियम के अनुपालन को कहा है। महावीर वन्य जीव बिहार के दस किलोमीटर दायरे को अगर देखा जाए तो रमपुरा, हरदारी, धौर्रा, कपासी सहित आसपास के ग्रामीण इलाके इसमें आ रहे हैं। खनन विभाग की अनुमति के पश्चात उक्त क्षेत्र में कई दर्जन खदाने संचालित हो रही हैं। लेकिन, सबसे अहम पहलू यह है कि किसी के पास भी भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति नहीं है। इन हालातों में खदानों पर फिलहाल खनन कार्य बंद होना तय माना जा रहा है। जानकारों का यह भी कहना है कि भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से एनओसी लेना आसान काम नहीं है।
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