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गुटखा बंद की तिथि घोषित होते ही घट गए दाम

Lalitpur

Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। सूबे में गुटखा की बिक्री बंद होने की तिथि घोषित होते ही गुटखा बनाने वाली कंपनियों ने माल को बाजारों में खपाना तेज कर दिया है। इसके चलते जिले में काफी समय से चल रही मुनाफाखोरी पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
प्रदेश सरकार ने 01 अप्रैल 2013 से गुटखा की बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। इससे गुटखा बनाने वाली कंपनियों के साथ थोक व फुटकर दुकानदारों में हड़कंप मचा हुआ है। कंपनियों ने तैयार माल को बाजारों में खपाने की कवायद तेज कर दी है। थोक विक्रेताओं ने भी पैकेट के रेट घटा दिए हैं। गुटखे के बाजार में यह बदलाव विगत दो दिनों के दौरान देखने को मिला है। इसके पूर्व जनपद में लंबे समय से गुटखा पर मुनाफाखोरी चल रही थी। जनपद में बेचे जाने वाले गुटखों के चर्चित ब्रांड के मूल्यों पर नजर डालें तो पैंसठ रुपये में बेचा जाने वाला एक ब्रांड डेढ़ सौ रुपया प्रति पैकेट फुटकर दुकानदारों को बेचा जा रहा था। इसी साठ रुपये कीमत वाले पैकेट नब्बे रुपये और एक सौ अट्ठारह रुपये वाला पैकेट एक सौ पैंतालीस रुपये तक बेचा जा रहा था। फुटकर दुकानदारों की मानें तो पिछले दो दिनों में उन्हें 93 रुपये कीमत वाला पैकेट 95 रुपये में, साठ रुपये वाला पैकेट 62 रुपये में और एक सौ अट्ठारह रुपये कीमत वाला पैकेट एक सौ बीस रुपये में मिलने लगा है।

खाद्य पदार्थ की श्रेणी में नहीं आते पाउच
खाद्य एवं सुरक्षा अधिनियम 2011 की धारा 2, 3 व 4 के अनुसार तंबाकूयुक्त पदार्थ खाद्य पदार्थ की श्रेणी में नहीं माने जाते हैं। यही कारण है कि गुटखा बंद किए जा रहे हैं। इनमें निकोटिन होने के कारण लोगों को बीमारियां होने की संभावना होती है।

रूप बदलने की कवायद
प्रदेश में गुटखे की बिक्री बंद होने की घोषणा होते ही कुछ कंपनियों ने गुटखे को दूसरे रूप में बेचने की तैयारी कर ली है। एक कंपनी ने तंबाकू व पान मसाला अलग-अलग पुड़ियों में बेचना शुरू कर दिया है, ताकि उसे गुटखा नहीं माना जाए।


गुटखे की तस्करी का गढ़ बना जिला
ललितपुर। सीमावर्ती मध्य प्रदेश में गुटखे की बिक्री प्रतिबंधित होने के कारण जनपद गुटखे की तस्करी का गढ़ बन गया है। यहां से रोजाना बड़े पैमाने पर गुटखे की तस्करी की जा रही है, जिसे रोकने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक कोई पहल नहीं की है। सीमावर्ती प्रदेश में गुटखे पर प्रतिबंध लगने के साथ ही जिले में गुटखे के तस्कर सक्रिय हो गए थे। यही कारण है कि सूबे में गुटखा प्रतिबंधित नहीं होने के बाद भी जनपद में उसकी जबरदस्त किल्लत रही। मुनाफाखोरों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। जानकारों की मानें तो जिले से मप्र के चंदेरी, अशोकनगर, टीकमगढ़, बीना, खुरई, सागर, भोपाल व नीमच आदि स्थानों को गुटखा भेजा जाता है।



बढ़ेगी पान की बिक्री
तुवन चौराहा स्थित पान मसाले की दुकान चलाने वाले विवेक कुमार का कहना है कि गुटखा बंद होने से धंधे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि पान की बिक्री बढ़ जाने से मुनाफा कमाया जा सकता है।

कमाई पर पड़ेगा असर
सुपर मार्केट में पान मसाला की दुकान चलाने वाले मिट्ठू चौरसिया का कहना है कि गुटखा की बिक्री बंद होने से धंधा प्रभावित होगा, क्योंकि इसकी बिक्री से अच्छी खासी कमाई हो जाती है।

बढ़ने लगी पान की बिक्री
कोतवाली के पास दुकान चलाने वाले बृजेश चौरसिया ने कहा कि पान मसाला बंद होने से पान के खाने वालों की संख्या में वृद्धि हो जाएगी। पिछले कुछ दिनों से इसका असर भी दिख रहा है।



बदल देंगे तरीका
ज्यादातर लोग पान मसाला के आदी हो गए हैं। गुटखा बंद होने से तंबाकू, सुपारी एवं अन्य सामग्री को मिलाकर उसका स्वाद लेना शुरू कर देंगे। क्याेंकि, खाना मजबूरी है और छोड़ना मुश्किल।

नहीं मिलेगा तो कैसे खाएंगे
गुटखा बंद हो जाना चाहिए, क्याेंकि इससे अनेक बीमारियां होती हैं। गुटखा नहीं मिलने पर उसकी आदत भी छूट जाएगी। जब बाजार में मिलेगा ही नहीं तो लोग खुद इसे खाना बंद कर देंगे।


प्रतिबंध का नहीं होगा असर
गुटखा बंद हो जाना चाहिए। पर, कई राज्यों में गुटखा बंद होने के बाद भी पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लग सका है। यहां भी बंद हो जाने से क्या बिकना बंद हो जायगा, यह जरूरी नहीं है।

नहीं मिलेगा, तो नहीं खाएंगे
पान मसाला का सेवन करने वाले सुमित जैन का कहना है कि गुटखा बंद होना स्वागत योग्य है। क्योंकि, इससे कैंसर जैसी बीमारियां होती हैं। जब मिलना बंद हो जाएगा तो हम खाना छोड़ देंगे।
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