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रोडवेज बस स्टैंड विहीन जनपद

Lalitpur

Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। सुनने में अजीब सा जरूर लगेगा पर सच्चाई यही है कि जनपद ललितपुर की 12 लाख आबादी होने के बावजूद रोडवेज का बस स्टैंड नहीं है। इतना ही नहीं जनपद में रोडवेज की सिर्फ एक बस का संचालन होता है वह भी ललितपुर से लखनऊ तक। रोडवेज ही नहीं इस रूट की ज्यादातर ट्रेनों का ठहराव भी यहां न होने के कारण प्रदेश की राजधानी तक जाने के लिए लोगों के पास विकल्प बहुत कम हैं।
1974 में जनपद का दर्जा पाने के बाद ललितपुर के नगरीय इलाकों का तेजी के साथ विस्तार हुआ। हर वर्ष नगर की सीमा में इजाफा होता रहा और आबादी भी बढ़ती गई। इसके सापेक्ष जनपद को यातायात के संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए। प्रदेश की राजधानी लखनऊ की ओर जाने वाली ट्रेनों पर नजर डाली जाए तो उनकी संख्या तो पर्याप्त है पर ललितपुर में ठहराव कुछ का ही है। ट्रेन न होने की स्थिति में लोग रोडवेज की बसों पर आश्रित हो जाते हैं। लेकिन, विडंबना यह है कि जनपद से लखनऊ की ओर जाने वाली रोडवेज की सिर्फ एक बस प्रतिदिन आवागमन करती है। यही नहीं यहां रोडवेज का बस स्टैंड तक मौजूद नहीं है। मध्य प्रदेश की सीमा से सटे इस जनपद के लोग प्रदेश की राजधानी लखनऊ से अलग थलग से पड़ गए हैं। इन स्थितियों का खामियाजा जनपदवासियों को तो भुगतना पड़ ही रहा है सूबे की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर हो रहा है। कारण, कारोबार से लेकर अन्य सभी गतिविधियों को जनपदवासी मध्य प्रदेश जाकर अंजाम देते हैं। यह समस्या हर व्यक्ति से जुड़ी हुई है पर अभी तक किसी ने इस दिशा में सार्थक पहल नहीं की। राजनीतिक व गैर राजनीतिक संगठनों ने भी जनपद में रोडवेज बस स्टैंड स्थापित करने के लिए अपनी आवाज बुलंद नहीं की। बाहरी जनपद के आने वाले लोग जिले में रोडवेज बस स्टैंड न होने और लखनऊ तक सिर्फ एक बस के संचालन की बात सुनकर चौंक जाते हैं।

पर्यटन उपेक्षित
ललितपुर। प्राकृतिक सौंदर्य को अपने में समेटे ललितपुर जनपद की वनांचली व ऐतिहासिक पुरातत्वीय स्थल हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। पर, आवागमन के संसाधन मजबूत न होने की वजह से जिले का पर्यटन उपेक्षित पड़ा हुआ है।

भोपाल में कराते हैं इलाज
ललितपुर। आवागमन के संसाधन न होने के कारण मरीजों को सबसे अधिक कष्ट उठाना पड़ता है। संसाधनों के अभाव में इलाज के लिए तीमारदारों का रुख लखनऊ, कानपुर की बजाए भोपाल व ग्वालियर की ओर रहता है।
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