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तकनीकी सहमति के बिना नहीं मिलेगा धन

Lalitpur

Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। तकनीकी संस्थाओं की सहमति के बगैर इस क्षेत्र में प्रस्तावित पेयजल योजनाओं को शासन मंजूरी नहीं देगा। करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जाने वाली योजनाओं की सौ फीसदी सफलता के लिए भारत सरकार ने यह व्यवस्था लागू कर दी है। यहां ललितपुर जनपद में इंजीनियरिंग कालेज के विशेषज्ञ प्रस्तावित योजनाओं की पड़ताल कर रहे हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र स्थित ललितपुर, झांसी, जालौन, उरई, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट जनपदों की प्रस्तावित पेयजल योजनाओं की जांच के लिए बुंदेलखंड इंजीनियरिंग कालेज झांसी को नामित किया गया है। इस क्षेत्र में उक्त कालेज की सहमति के बगैर कोई भी योजना स्वीकृत नहीं होगी।
आमतौर पर देखा जाता है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद पाइप लाइन पेयजल योजनाएं पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाती है, जिसकी वजह से जनता की गाढ़ी कमाई बर्बाद हो जाती है और योजना सफेद हाथी साबित होती है। इसके अलावा किसी भी योजना के आगणन में कार्यदायी संस्था को जानबूझकर लाभ देने के लिए भी खेल किया जाता है। टेंडर प्रक्रिया हो जाने के पश्चात विभागीय अफसर कार्यदायी संस्था से इस खेल की कीमत वसूल कर लेते हैं। इन हालातों से बचने के लिए शासन ने आगणन के सत्यापन और प्रस्तावित योजना की कार्यक्षमता टटोलने को नयी व्यवस्था लागू कर दी है, जिसके तहत पाइप लाइन पेयजल योजना को मंजूरी देने से पहले तकनीकी विशेषज्ञों से उसका सत्यापन कराया जाएगा। टंकियों की डिजाइन, पानी का हाइड्रोलिक लोड, डिस्चार्ज व आगणन में दी गई लागत जांची जाएगी। इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में इंजीनियरिंग कालेजों व तकनीकी संस्थाओं को नामित किया गया है। जानकारों का कहना है कि इससे अफसरों की मनमानी पर लगाम लग जाएगी।

नजीर है पिपराबांसा
ललितपुर। जल निगम ने करोड़ों रुपये खर्च करके धौर्रा के पास बेतवा नदी में इंटेकवैल बनाकर पिपराबांसा पेयजल योजना को मूर्त रूप दिया था। कई वर्षों तक तो सब कुछ ठीकठाक चलता रहा और अस्सी गांवों को पानी आपूर्ति की जाती रही, लेकिन धीरे- धीरे योजना फेल हो गई। वोल्टेज की कमी बताकर विभागीय अधिकारियों ने लाखों रुपये के स्टेवलाइजर लगवा लिए फिर भी पानी की आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी। फिलहाल आठ गांवों में ही पेयजल आपूर्ति हो रही है।
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