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बारिश ने तैयारियों की खोली कलई

Lalitpur

Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। बारिश शुरू होते ही प्रशासन की तैयारियों की कलई खुल गई है। चारो ओर गंदगी और जल भराव से गिरते गरीबों के कच्चे घर इस बात का उदाहरण हैं कि प्रशासन बारिश से पूर्व कोई तैयारी नहीं की। प्रशासन के इस गैर जिम्मेदार रवैया का खामियाजा उस गरीब जनता को भुगतना पड़ता है, जिसके सिर से उसका आशियाना छिन जाता है।
निर्माण की खुली पोल
बारिश होते ही शहर भर में हुए निर्माण की पोल खुल गई है। सड़कों की सूरत अब बदसूरती में बदल गई है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी गिट्टी पर वाहन चालकों का चलना तो मुश्किल हो ही रहा है, इसके साथ ही पैदल चलने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह हाल तो शहर की प्रमुख सड़कों का है, मुहल्लों का हाल तो यह है कि बारिश होते ही घटिया निर्माण से बनी सड़कें बह गईं हैं। बारिश से पूर्व प्रशासन ने सड़कों को सुधारने का कोई प्रयास नहीं किया जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिससे आए दिन दुर्घटनाएं देखने को मिल रहीं हैं।

जल भराव बनी विकराल समस्या
इस मौसम में जल भराव एक विकराल समस्या के रुप में हमारे सामने है। इससे कई कच्चे घर गिर गए हैं और कई गिरने वाले हैं। प्रशासन ने बारिश से पूर्व न तो जर्जर मकानों को चिह्नित किया न ही बाढ़ एवं जल भराव को रोकने के लिए कोई व्यवस्था की। इसका खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ा, जिससे उनका आशियाना प्रशासन के गैर जिम्मेदार रवैये के कारण छिन गया।

बीमारियों ने पसारे पैर
नालों से बहकर आई गंदगी से बीमारियों ने भी अपने पैर पसार लिए हैं। अब अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं बची है। खाली जगह में भी पलंग बिछाकर काम चलाया जा रहा है। चाहे प्राईवेट अस्पताल हो या सरकारी सब का हाल-बेहाल है। कैसे मिले सभी लोगों को समय पर इलाज। डॉक्टर भी समय पर नहीं आ रहे हैं, जिससे सुबह होते ही अस्पतालों में भटकते मरीज देखे जा सकते हैं। प्रशासन न समय पर इलाज और दवाईयों की व्यवस्था नहीं की।

नाली एवं नहरों की नहीं हुई सफाई
नाली में भरी गंदगी एवं कचरा भी बारिश होते ही समस्या बन जाता है। यही कारण है कि बारिश होते ही नाली एवं नहरें बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित कर देती हैं।
प्रशासन को समय से पहले इनकी सफाई करवानी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
शासन-प्रशासन ने अपने गैर जिम्मेदारी के कारण जनता को परेशानी हो रही है। आखिर यह उदासीन रवैया क्यों?
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