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बंद स्कूल खोलने की चुनौती

Lalitpur

Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
ललितपुर। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के समायोजन व स्थानांतरण प्रक्रिया की राह आसान नहीं दिख रही है। हालातों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग एक बत्तीस स्कूलों में शिक्षकों का टोटा चल रहा है तो साढे़ तीन सैकड़ा से अधिक स्कूल एक शिक्षक के सहारे हैं। इसके अलावा एक सौ पैंतीस नए विद्यालयों के सुचारु संचालन की चुनौती भी अफसरों के सामने है।
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की जबरदस्त कमी चल रही है। गत माह 75 शिक्षकों के सेवानिवृत्त होे जाने से हालात और नाजुक हो गए हैं। इसके बाद भी नए शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी है। टीईटी के पेच में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया लटकी हुई है। ऐसे में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या के सहारे ही स्कूलों के संचालन का जिम्मा विभागीय अफसरों पर है। इसे ध्यान में रखकर समायोजन व स्थानांतरण की प्रक्रिया चलाई जा रही है। जिले में कार्यरत शिक्षकों पर नजर दौड़ाएं तो स्थिति काफी चिंताजनक है। जनपद के लगभग एक सौ बत्तीस स्कूलों में कोई अध्यापक नहीं है। विकासखंड मड़ावरा में सबसे ज्यादा अध्यापकविहीन स्कूल हैं। स्थित यह है कि यहां के तमाम विद्यालय शिक्षा मित्रों के भरोसे चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त करीब तीन सौ बासठ स्कूलों में एक ही शिक्षक है। विकासखंड तालबेहट के प्राथमिक विद्यालय रसगईयन खिरक में कोई शिक्षक और शिक्षा मित्र नहीं है। वहीं, नए विद्यालयों का संचालन भी चुनौती बना हुआ है। नवीन स्कूलों में न तो पद सृजित हो सके हैं और न ही शिक्षकों की नियुक्ति हो सकी है। ऐसे में विभागीय अफसर समायोजन व स्थानांतरण के जरिए बंद विद्यालयों में शिक्षकों को भेजने की कवायद में जुटे हैं। जानकारों का कहना है कि समायोजन व स्थानांतरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो बंद विद्यालयों का ताला खुलना मुश्किल हो जाएगा।

शिक्षकों के हजारों पद खाली
ललितपुर। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत देखें तो जिले में शिक्षकों की रिक्तियों की संख्या हजारों में पहुंच गई है। प्राथमिक विद्यालयों में तीस छात्रों पर एक शिक्षक रखने का मानक है। जूनियर हाईस्कूल में पैंतीस छात्रों पर एक शिक्षक तैनात करने की व्यवस्था की गई है। इस मानक के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों में 753 प्रधानाध्यापक एवं 2673 सहायक अध्यापकों के पद सृजित हैं। इसी प्रकार जूनियर हाईस्कूल में 464 प्रधानाध्यापक, 1451 सहायक अध्यापकों के पद सृजित हैं। इस तरह प्राथमिक विद्यालयों में 300 प्रधानाध्यापक, 2081 सहायक शिक्षकों की सख्त जरूरत है। वहीं, जूनियर हाईस्कूलों में 53 प्रधानाध्यापक एवं 469 सहायक अध्यापकों की आवश्यकता है।
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