आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

जैव संपदा से माटी को उपजाऊ बनाएं

Lakhimpur

Updated Mon, 17 Dec 2012 05:31 AM IST
लखीमपुर खीरी। असंतुलित मात्रा में रसायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं के अधिक प्रयोग से मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवों में लगातार कमी आ रही है। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है। फसलों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि आधुनिक तकनीकों के मिश्रण से जैव संपदा का संवर्द्धन और सरंक्षण कर मिट्टी को फिर से जगाया जा सकता है।
देश में जैविक कृषि का इतिहास 5000 साल से भी अधिक पुराना है। इसके चलते मिट्टी ने अपनी उर्बरा शक्ति को संजोए रखा। हरित क्रांति व कृषि औद्योगीकरण के नाम पर सघन खेती और अधिक उत्पादन पाने के लिए असंतुलित मात्रा में रसायनिक खादों में कीटनाशकों के प्रयोग के कारण मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों में दिन प्रतिदिन कमी आती जा रही है। इससे मिट्टी मौजूद तत्वों नाइट्रोजन, रोगों और हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने में मिट्टी असफल हो रही है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहेल कहते हैं कि परंपरागत प्रणाली और आधुनिक तकनीक के समिश्रण से जैव संपदा का संवद्धन और सरंक्षण किया जा सकता है। इसके लिए संतुलित और जैविक खेती की प्रणाली को अपनाना होगा। मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ाने के लिए राइजोवियम कल्चर, पीएसवी कल्चर, एजेक्टोवेक्टर, नील, हरित शैवाल, केचुआ, नाडेप खाद, ट्राइकोड्रमा पाउडर, बेबेरिया बैसियाना सिडोमोनास, नीम तेल, खली आदि का विभिन्न फसलों में बीज शोधन, जड़ शोधन और भूमि शोधन के लिए किया जाता है।
00000
फसलों के लिए पोषक तत्व जुटाते है जीवाणु
डॉ. सुहैल बताते हैं कि दलहनी फसलों में राइजोवियम और गन्ना गेंहूं आदि में एजेक्टोवेक्टर की अलग-अलग प्रजातियों का प्रयोग किया जाता है। यह जीवाणु वातावरण में मौजूद नाइट्रोजन को शोधित कर फसल को उपलब्ध कराता है। पीएसबी कल्चर का सूक्ष्म जीव भूमि में अघुलनशील फास्फोरस को घुलनशील बनाकर पौधे को उपलब्ध कराता है। ट्राइकोड्रमा पाउडर का प्रयोग फसलों में लगने वाले सूखा रोग सड़न आदि में बीज शोघन के रूप में किया जाता है। पत्तियों पर भी छिड़काव होता है।
0000
बीमारियों, कीटों से बचाव करते हैं जैविक तत्व
आधुनिक तकनीक के तहत स्यूडोमोनास आलू, खीरा, मिर्चा, टमाटर, बैंगन आदि में लगने वाली बीमारियों में पत्तियों पर छिड़काव किया जाता है। बैविरिया बेसियाना कवक का प्रयोग दीमक, सुंडी, गव, विविल आदि कीटों से बचाव के लिए किया जाता है। डॉ. सुहैल का कहना है कि भूमि में कार्बनिक खादों का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा किया जाना चाहिए ताकि सूक्ष्म जीवाणु भूमि में अधिक संख्या में उपलब्ध हो सकें।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

शरद से ब्रेकअप के बाद टूट गई थी दिव्यांका, इस एक्टर ने बदल दी जिंदगी

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

फिल्में न होने के बावजूद करोड़ों की मालकिन हैं रेखा, लाइफस्टाइल देख होगी जलन

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

इस नक्षत्र में जन्मे लोग आम और आंवले के पेड़ से रहें दूर, फायदे में रहेंगे

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

गॉडफादर न होने पर क्या होता है, कोई इस हीरोइन से पूछे! पहली फिल्म में कुछ यूं हुई थी बेबस

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

ईद पर सलमान खान से लेकर शबाना आजमी के घर बनता है ये लजीज खाना

  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

Most Read

ईद पर शबाना के SMS से DM का दिल पसीजा, तोहफे में दी ईदी

Eid Mubarak Shabana sent SMS to Varanasi DM, got Idi in gift
  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

मारा गया कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल, देर रात हुआ एनकाउंटर

gangster anandpal encountered by rajasthan police
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +

हरियाणा से मिला सुराग और फिर यूं चला एनकाउंटर आॅपरेशन

gangster  anandpal singh full encounter update
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +

आनंदपाल एनकाउंटर: शव अभी भी अस्पताल में, आज भी तनाव के हालात

tension still in anandpal village, family refuse to take body
  • सोमवार, 26 जून 2017
  • +

आनंदपाल एनकाउंटर: जीता था शाही लाइफ और करता था दाउद को फॉलो

anand pal singh's lifestyle
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +

आनंदपाल एनकाउंटर पर सवाल, ये दे रहे है दलीलें

question raised over gangster anandpal singh encounter
  • रविवार, 25 जून 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top