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वाहनों की रफ्तार वन्य जीवों के लिए बन रही काल

Lakhimpur

Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
यहां तो जंगल के अंदर से गुजरती हैं रेल लाइन
लखीमपुर खीरी। वाहनों की तेज रफ्तार जंगली जानवरों के लिए काल सबित हो रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि दुधवा टाइगर रिजर्व स्थापित होने के बाद से अब तक कम से कम 10 बाघ सड़क हादसों और रेल दुघर्टनाओं में मारे जा चुके हैं। दुधवा नेशनल पार्क के घने जंगल के अंदर से गुजरी रेल लाइन जंगली जानवरों के लिए डेंजर लाइन बनी हुई है। तो जंगल की सड़कों पर आवागमन भी वन्य जीवों के लिए कम खतरनाक नहीं है।
मंगलवार की रात लखीमपुर-बहराइच रोड पर भारी वाहन की चपेट में आकर कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार से निकले फिसिंग कैट के दो शावकों की मौत हो गई। इनमें एक नर तथा दूसरा मादा था। दोनों शावक वयस्क थे। दुर्लभ प्रजाति का यह जीव कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में बड़ी संख्या में मिलते हैं। फिसिंग कैट मछलियां खाकर जीवित रहते हैं। चूंकि नैनहा नाले के पास मछलियों की बहुतायत है। संभव है कि मछलियों के शिकार के लिए यह फिसिंग कैट यहां आए होंगे।
जंगल के अंदर या जंगल से सट कर निकली सड़कों पर फर्राटा भरते वाहनों से टकराकर आए दिन बाघ और दूसरे जंगली जानवरों की मौत होना आम बात हो गई है। जंगल के अंदर हार्न बजाने और वाहनों की रफ्तार सीमित रखने के निर्देश हैं, लेकिन दोनों ही निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। इसके चलते होने वाली दुघर्टनाएं दुर्लभ वन्यजीवों को मौत के मुंह में ढकेल रहीं हैं।
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सड़क हादसों में जान गवां चुके कई बाघ
-2004 में कतर्निया घाट वन्यजीव विहार के मंझरा-खैरटिया के बीच ट्रेन से कट कर एक बाघ की मौत।
-27 मई 2005 को सोनारीपुर रेंज में ट्रेन से कटकर एक बाघ की मौत।
-2006 में दुधवा नेशनल पार्क में एक बाघ ट्रेन से कटा।
-2008 के जनवरी माह में कतर्निया घाट में सड़क दुर्घटना में बाघ की मौत।
-2010 में बंडा-खुटार रोड पर सड़क दुर्घटना में एक बाघ की मौत
-30 जुलाई 2011 में भीरा-पलिया मार्ग पर सड़क दुघर्टना में बाघिन की मौत।
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दूसरे जंगली जानवर भी हुए हादसों का शिकार
जंगल से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर ट्रेन से कट कर कई जंगली हाथियों, भालू और हिरन भी मौत के मुंह में समा चुके हैं। इसी तरह सड़क हादसों में दर्जनों की संख्या में नील गाय और दुर्लभ प्रजाति के कई हिरन अपनी जान गवां चुके हैं। सड़क पार करती नील गाय तो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। कई बार तो इससे टकरा कर बाइक सवार भी अपनी जान गवां चुके हैं।
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जंगल के अंदर से गुजरी रेल लाइन वन्यजीवों के लिए मौत की लकीर साबित हो रही है। बाघों और हाथियों समेत कई जानवर ट्रेन से कट कर मर चुके हैं। जंगल के अंदर से गुजरी सड़काें पर वाहनों और रेल लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार ही नहीं आवागमन भी सीमित होना चाहिए तभी जंगली जानवर सुरक्षित रह सकेंगें।
-डॉ. वीपी सिंह, सदस्य-राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद उत्तर प्रदेश।
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