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अस्थमा मरीजों के लिए कोहरा घातक

Lakhimpur

Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
बच्चों के लिए अधिक सावधानी की जरूरत
लखीमपुर खीरी। दिनों-दिन ठंडक का असर बढ़ता जा रहा है। ठंड और कोहरे में जहां अस्थमा के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ जाती है वहीं बच्चों की बीमारियाें का भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों की देखभाल में खास सावधानी बरतनी पड़ती है। जरा सी लापरवाही बच्चों के लिए भारी पड़ सकती है। कोहरे में यह बीमारियां कुछ ज्यादा ही विकराल रूप ले लेती हैं। इधर दो दिन से जिले में कोहरे का प्रकोप बढ़ा है तो अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। सावधान रहकर इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
ठंड के मौसम में बच्चों की सर्दी, जुकाम, खांसी और निमोनिया जैसी बीमरियां बढ़ जाती हैं। निमोनिया में बच्चों की पसलियां चलने लगती हैं बच्चों को सांस लेने में भी तकलीफ होती है। जिन बच्चों को अस्थमा होता है उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो जाती है उनकी सांस फूलने लगती है। अस्थमा में फेफड़ों ओर श्वांस नली में संक्रमण हो जाता है। कोहरे में यह समस्या और बढ़ जाती है। अस्थमा का अटैक ज्यादातर रात में पड़ता है क्योंकि रात में ठंडक ज्यादा होती है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आईबी त्रिपाठी ने बताया कि कोहरे के कारण सांस के जरिए धूल कण फे फड़ों में पहुंच जाते हैं जो नुकसान पहुंचाते हैं। धूल, धुंआ, फंगस और फूलों के पराग कण भी अस्थमा रोगियों की परेशानी बढ़ाते हैं। इसके अलावा कमरों में डाले जाने वाले मोटे गलीचों में धूल तथा मरे हुए छोटे कीड़ो के अंश दबे रहते हैं यह भी फेफड़ों में पहुंचकर संक्रमण कर देते हैं। इससे भी अस्थमा और इसके जैसी कई और बीमारियां होने का खतरा रहता है। बेहतर उपचार न मिलने पर पीड़ित की मौत तक हो जाती है।
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क्या करें बचाव
डॉ. आईबी त्रिपाठी ने बताया कि जिन लोगों को अस्थमा की परेशानी है वे लोग कोहरे में चलने से बचाव करें और यदि चलना हो तो चेहरे को ढक लें। इसके अलावा जहां तक हो सके फ्रिज की चीजें न खाएं। बच्चों को ज्यादा स्नान न कराएं और जहां तक हो सके गर्म पानी से स्नान कराएं। बच्चों को खुली ठंडी हवा तथा धूल जैसे वातावरण में न रहने दें, ज्यादातर बंद कमरों में रखें। गर्म कपड़े पहनाएं । जहां तक हो सके घर का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से कम न होने दें। समस्या होने पर प्रशिक्षित चिकित्सक को ही दिखाएं।
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