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जिले में कसता जा रहा है एड्स का शिकंजा

Lakhimpur

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
विश्व एड्स दिवस पर विशेष: ‘एड्स शून्य’ पर कार्य करेगा स्वास्थ्य विभाग
सिटी रिपोर्टर
लखीमपुर खीरी। तमाम प्रयासों के बावजूद एड्स का शिकंजा कसता जा रहा है। इस वर्ष अब तक जिले में एचआईवी पॉजिटिव रोगियाें का आंकड़ा 45 तक पहुंच चुका है। बढ़ती संख्या से चिंतित स्वास्थ्य विभाग ने इस बार जहां ग्रामीण क्षेत्रों तक कांउसिलिंग कराने की योजना बनाई है, वहीं एड्स शून्य के लक्ष्य पर कार्य करने का फैसला किया है।
जिले में पहली बार वर्ष 2003-04 में एक एचआईवी पॉजिटिव केस मिला था। जिससे स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ गई थी। शासन स्तर से एड्स जागरूकता के कार्यक्रम शुरू हुए। विचार गोष्ठी कर लोगों को एड्स जैसी भयावह बीमारी के बचाव बताने के प्रयास किए तो गए, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला ही रहा। दिनों दिन यह संख्या बढ़ती रही। वर्ष 2012 में एचआईवी पॉजिटिव की संख्या बढ़कर 45 तक पहुंच गई है। इस बार स्वास्थ्य विभाग ने इसे चुनौती के रूप में लिया है। एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभारी डॉ.बलवीर सिंह ने बताया कि एड्स जैसी बीमारी के बारे में जहां जगरूकता कार्यक्रमों को बढ़ाने की योजना है, वहीं अब ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी और पीएचसी पर एड्स की काउंसिलिंग सुविधा शुरू करने का निर्णय भी किया गया है। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए क्षयरोग केंद्र पर एक दिसंबर को विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष एड्स शून्य, भेदभाव शून्य का लक्ष्य लेकर कार्य किया जाएगा। इसके अलावा स्वयंसेवी संस्थाएं भी इसके लिए सक्रिय हुई हैं।
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क्या है एचआईवी
डॉ.बलबीर सिंह ने बताया कि एचआईवी एक वायरस है। इसे ह्यूमेन इम्यूनो डेफिशेयनसी वाइरस कहा जाता है। जब यह मानव के शरीर में पहुंच जाता है तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है। इसके बाद शरीर में विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं, जो फिर कभी ठीक नहीं होते। जागरूक होकर ही इससे बचा जा सकता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
जिले में एचआईवी पॉजिटिव की संख्या बढ़ने के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एड्स जैसी बीमारी से समाज जागरूक होकर ही लड़ सकता है। संक्रमण हो जाने के बाद इसे मिटाने के लिए कोई टीका या दवा अभी तक विकसित नहीं हुई है। जिला और महिला अस्पताल में इससे संबंधित काउंसिलिंग सुविधा है। अब यह सुविधा ग्रामीण क्षेत्र की सीएचसी और पीएचसी में भी दिए जाने की योजना है।
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एचआईवी पाजिटिव केआंक ड़े
वर्ष एचआईवी पाजिटिव की संख्या
2006-7 02
2007-8 03
2008-9 04
2009-10 02
2010-11 07
2011-12 07
2012-13 07
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