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थारू-जनजाति की बिटिया बनेगी डॉक्टर

Lakhimpur

Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
बाकेगंज। अगर हौसला बुलंद हो तो मंजिल आसान हो जाती है। यह कर दिखाया एक वनवासी थारू छात्रा ने। दुधवा नेशनल पार्क के घने जंगलों में बसे थारू-जनजाति के गांव में पर्याप्त शिक्षा व्यवस्था नहीं होने के बावजूद लेखपाल नेकीराम की बेटी हेमंती ने सीपीएमटी की राज्यस्तरीय परीक्षा में 34 वीं रैंक हासिल की है। लेखपाल की बेटी अब 44 गांव में बसे थारूओं की पचास हजार से अधिक आबादी में पहली डॉक्टर होने का गौरव हासिल करने जा रही है।
दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में बसे सेढाबेढ़ा गांव के रहने वाले नेकीराम किसी तरह पढ़ाई पूरी कर लेखपाल बने। अपने क्षेत्र के पिछड़ेपन से निकलने की ललक उनके मन में शुरूआती दौर से ही थी। सो उसने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने की ठानी। संयोग से उनकी पोस्टिंग गोला तहसील में हो गई। सन् 1994 से वह अपने परिवार के साथ बांकेगंज रोड पर किराए के एक छोटे मकान में रहने लगे और अपनी बेटी हेमन्ती का दाखिला सरस्वती शिशु मंदिर गोला में करा दिया। जहां वह अच्छे नम्बरों से पास हुई। कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई विद्या कुवंरि स्मारक सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कालेज गोला में की। जहां वह स्कूल की मेधावी छात्रा थी। उसने सभी परीक्षाएं प्रथम श्रेणी में पास की। इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीपीएमटी की परीक्षा में बैठी। पहले ही प्रयास में उसे सफलता जरूर हासिल की लेकिन अच्छी रैंक नहीं मिलने पर उसे संतोष नहीं मिला। दूसरे प्रयास में 34 वीं रैंक हासिल कर कामयाबी हासिल की। अब वह मेरठ के लाला लाजपतराय मेडिकल कालेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में दाखिला लेकर स्वास्थ्य सेवाओं में भविष्य तराश रही है। उसकी तमन्ना कुशल सर्जन बनकर क्षेत्र की सेवा करने की है।
वनवासी थारू जनजाति के लोग अंधविश्वास के चलते झाड़ - फूंक और देसी जड़ी बूटियों पर अधिक निर्भर रहते है। वह पढ़े-लिखे डाक्टरों से इलाज करवाने में कतराते रहते हैं। जिसके चलते थारू समाज के लोग गांव के डाक्टर जिसे वह अपनी बोली में भर्रा कहते है। अपनी कीमती जान को जोखिम में डालकर अंधविश्वास के चलते उससे ही इलाज करवाना पसंद करते हैं। हेमंती का कहना है कि वह डॉक्टर बनकर अपने समाज के लोगों की आंख पर अंधविश्वास के परदे को हटाने की मुहिम छेड़ कर उनको बेहतर चिकित्सा सेवा देने का बीड़ा उठाएगी।
हेमंती की मां उमा देवी उसकी इस सफलता पर गदगद हैं। उनका कहना हे कि वह अपनी बेटी हेमन्ती के साथ बेटे अमित और बेटियां नीलिमा एवं दीपिका को भी बेहतर शिक्षा दिलवाएंगीं। स्कूल के प्रिसिंपल महेन्द्र त्रिपाठी और शिक्षक हेमन्ती भी इस कामयबी पर बेहद खुश है।
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