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गांवों में विकास थमने पर जिम्मेदार ‘कौन’

Lakhimpur

Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। गांवों में विकास का पहिया थमता नजर आ रहा है, क्योंकि केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट का आवंटन चालू वित्तीय वर्ष में नहीं हुआ है। जबकि आधे सत्र से अधिक समय बीत चुका है। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष में खर्च की गई धनराशि का हिसाब देने में पिछड़ी 710 ग्राम पंचायतों के खाता संचालन पर रोक लगा दी गई है, जिससे भी गांवों के विकास का गणित गड़बड़ा गया है। अफसर पशोपेश में हैं कि इन विपरीत हालातों के लिए ‘असल’ जिम्मेदार कौन है। लिहाजा इसका निर्णय न होने के चलते ग्राम पंचायत अधिकारियों व प्रधानों को नोटिस देने तक ही कार्रवाई सिमट कर रही गई।
शासन ने प्रियासाफ्ट पर फीडिंग कराना वर्ष 2010-11 से अनिवार्य कर दिया था। बताते चलें कि इससे पूर्व ग्राम पंचायतों को उपभोग प्रमाण देना होता था, जिसकी प्रगति भी न के बराबर थी। करीब दो साल पूर्व भी डीपीआरओ ने उपभोग प्रमाण पत्र न देने वाली ग्राम पंचायतों पर शिकंजा कसने का प्रयास किया था। हालांकि कोई कारगर कार्रवाई नहीं हुई थी। प्रियासाफ्ट पर ब्यौरा देने में फिर से ग्राम पंचायतें फिसड्डी साबित हुई हैं। कार्रवाई के नाम पर एडीओ पंचायत व ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को चेतावनी दी गई है, जिसका कोई असर नहीं दिख रहा।
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चालू वर्ष में पंचायतों को मिले 11.34 करोड़
चालू वित्तीय वर्ष में 995 ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त आयोग से बतौर पहली किस्त 11.34 करोड़ का बजट दिया जा चुका है। जबकि तेरहवें वित्त आयोग से बजट नहीं मिला है। वहीं 15 क्षेत्र पंचायतों को 1,63,68,000 रुपये की धनराशि दी जा चुकी है।
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नियत तिथि के बाद बढ़ जाती है समय सीमा
कारणों के बारे में सूत्र बताते हैं कि ग्राम पंचायत में होने वाले कार्यों में सेक्रेटरी के साथ ही प्रधान की बराबर की हिस्सेदारी रहती है। डीपीआरओ ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को नोटिस देकर दबाव बनाना शुरू किया है, लेकिन कार्रवाई करने से कदम पीछे हटा रहे हैं। बताते चलें कि करीब एक साल से ऐसी ही कशमकश जारी है। हर बार समय सीमा खत्म होने के बाद नई समय सीमा जारी हो जाती है। इससे विषम स्थितियां उत्पन्न हो रहीं है, जिसकी जिम्मेदारी तय करने में अधिकारी पशोपेश में हैं। तकनीकी कारणों के चलते प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई करने से अफसर कतरा रहे हैं।
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