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अस्पताल की चौखट पर इलाज के अभाव में दम तोड़ा

Lakhimpur

Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
ग्रामीणों में फूटा गुस्सा, शव को चौराहे पर रखकर किया प्रदर्शन
समर्थन में उतरे व्यापारियों ने भी दुकानें बंद कर किया ग्रामीणों का समर्थन
गुस्साई भीड़ को कंट्रोल करने को पुलिस छावनी में तब्दील हुआ कस्बा
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर बृहस्पतिवार की रात में लाए गए एक मरीज को देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं मिला। अस्पताल की एक बैंच पर पड़ा वह सीने में दर्द से तड़पता रहा। परिवार वाले डॉक्टरों को ढूंढते रहे। इसी बीच युवक ने दम तोड़ दिया। इस मौत की वजह बनी चिकित्सकों की गैर जिम्मेदारी से युवक के परिवार वालों में ही नहीं, उसके गांव के लोगों में भी उबाल आ गया। रात की इस घटना का गुस्सा शुक्रवार की सुबह सड़कों पर फूट पड़ा।
ग्रामीणों ने सुबह आठ बजे मृतक का शव सड़क पर रखकर धरना दिया और जाम लगा दिया। चार घंटे तक अफरातफरी का माहौल रहा। कस्बा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। एसडीएम एसपी सिंह, सीओ टीपी सिंह और सीएमओ डॉ. एनएल यादव ने दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब कहीं आंदोलित ग्रामीण शांत हो सके। इस बीच क्षेत्रीय विधायक रोमी साहनी ने मृतक के परिवार वालों को 50 हजार की सहायता प्रदान कर दुखते घाव पर मलहम लगाने का काम किया।
कस्बे के पड़ोसी गांव कोठीपुर निवासी 40 वर्षीय युवक अनिल कुमार मार्केट में प्राइवेट चौकीदारी करता था। बृहस्पतिवार की शाम सीने में दर्द महसूस होने पर उसे परिवार वाले सीएचसी ले गए। वहां अंधेरा पसरा होने के साथ ही डॉक्टर और कोई स्टाफ कर्मी मौजूद नहीं था। दर्द और तेज हो गया तो परिवार वाले उसे कंपाउंड में पड़ी खाली बेंच पर लिटाकर डॉक्टर के आवास पर गए तो वहां ताला लटका था। वे मरीज को लखीमपुर ले जाने की बात सोच ही रहे थे कि सीएचसी में ही उसकी मौत हो गई।
सुबह तक अनिल की सीएचसी में इलाज के अभाव में मौत की खबर पूरे इलाके में फैल गई। धीरे-धीरे सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवक मृतक के घर पहुंच गए। डॉक्टरों की लापरवाही और व्यवस्था के खिलाफ लोगों का आक्रोश भड़क उठा। सुबह करीब आठ बजे शव को लेकर लोग गोला-कुकरा रोड चौराहे पर एकत्र हो गए और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोग लापरवाह चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने और मृतक के परिवार वालों को 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग करने लगे। क्षेत्रीय विधायक रोमी साहनी ने मृतक के परिवार वालों को 50 हजार रुपये सहायता दिए जाने का आश्वासन दिया।
एसडीएम एसपी सिंह ने डीएम के दिए गए आश्वासन की जानकारी लोगों को दी। नेताओं ने भी भीड़ को मनाया। एसडीएम ने बताया कि डीएम के आदेश पर पारिवारिक लाभ योजना की राशि मृतक के परिवार को तत्काल दी जाएगी। सीएमओ ने बताया कि मृतक के भाई राममूर्ति की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज किए जाने की संस्तुति होगी। यहीं नहीं सीएचसी के डॉक्टर बी कुमार के खिलाफ शासन को कार्रवाई के लिए लिखा जा रहा है। इतने आश्वासन और खुशामद पर करीब 12 बजे लोग माने और धरना प्रदर्शन खत्म किया। इधर, एसडीएम ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है और गांव जाकर लोगों के बयान लिए हैं।
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बांकेगंज में अस्पताल में मौत के बाद हंगामे का घटनाक्रम
बृहस्पतिवार, रात 8 बजे
ग्राम कोठीपुर निवासी अनिल के सीने में दर्द उठा। परिवार वालों के संग वह इलाज के लिए सीएचसी पहुंचा।
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रात 11बजे
डॉक्टर नहीं मिले तो स्टाफ नर्स मेल उपेंद्र ने उसे इंजेक्शन दिया। रात 11 बजे के लगभग इलाज के अभाव में सीएचसी में ही अनिल की मौत हो गई।
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शुक्रवार, सुबह 8 बजे
सैकड़ों की संख्या में नाराज लोग मृतक अनिल की लाश चारपाई पर रखकर कस्बे के चौराहे आ गए। जाम लगाकर नारेबाजी शुरू कर दी। व्यापारियों ने भी समर्थन में दुकाने बंद कर दीं। डॉक्टर और सीएचसी स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग के साथ ही मृतक के परिवार वालों को दस लाख रुपये मुआवजे की मांग की।
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सुबह 8.30 बजे
थानाध्यक्ष मैलानी जितेन्द्र यादव मय दलबल मौके पर पहुंचे। आला अधिकारियों को घटना की जानकारी दी।
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सुबह 9.30 बजे।
एसडीएम एसपी सिंह, सीएमओ डॉ. एनएल यादव और डिप्टी सीएमओ डॉ. बीबी राम पहुंचे। जिनको देखते ही मौजूद हुजूम ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी तेज कर दी। सीएमओ ने सूझबूझ का उदाहरण पेश करते हुए प्रदर्शनकारियों से घटना के संबध में जानकारी हासिल की और दोषी डॉक्टर के खिलाफ शासन से कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। गुनहगार डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की मांग पर भी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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सुबह 10 बजे।
सुबह 10 बजे के लगभग क्षेत्रीय बसपा विधायक रोमी साहनी और पूर्व विधायक अरविंद गिरी बांकेगंज पहुंचे। जिन्हें देखते ही एक बार फिर प्रदर्शनकारियों में जोश आ गया। यह नेता भी धरनास्थल पर बैठ गए। रोमी साहनी ने मृतक की विधवा और बच्चों के नाम पचास हजार रुपये एफडी कराने की घोषणा की।
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पूर्वाह्न 11 बजे
एसडीएम गोला एसपी सिंह और सीओ टीपी सिंह ने प्रदर्शनकारियों से बात की। एसडीएम और सीओ ने 1100-1100 रुपये की नगद आर्थिक सहायता मृतक की पत्नी को दी।
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दोपहर 12 बजे
जिला पंचायत प्रशासनिक समिति की अध्यक्षा कमल पाल के पुत्र मोंटी और स्थानीय नेता गोपाल बिहारी सिन्हा भी पहुंचे। पूर्व ब्लाक प्रमुख कुसमा देवी ने भी मृतक के परिवार वालों को दस हजार रुपये नगद आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने भी परिवार वालों और प्रदर्शनकारियों से बातकर जाम खुलवाने की पहल की। सभी ओर से पड़े दबाव पर ग्रामीणों ने जाम खोल दिया।
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अपराह्न 2 बजे
दोपहर दो बजे के बाद मृतक अनिल का अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें क्षेत्र के हजारों लोग मौजूद रहे।
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खुद ही बीमार है सेहत महकमा
सीएचसी और पीएचसी पर महिला डॉक्टरों का टोटा
फार्मासिस्ट और वार्डब्वाय के सहारे चल रहे अस्पताल
लखीमपुर खीरी। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं तो खुद ही बीमार नजर आ रही हैं। सबको मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा करने वाला सेहत महकमा इलाज के लिए पर्याप्त डॉक्टर ही मुहैया नहीं करा पा रहा है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो फार्मासिस्टों और वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहे हैं। जिले में महिला डॉक्टरों की संख्या तो बहुत ही कम हैं। इसके चलते प्रसव कराने से लेकर महिलाओं की नसबंदी तक पुरुष डॉक्टरों को ही करनी पड़ती हैं।
जिले में कुल 56 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 56 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें तीन ब्लाक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सीएचसी और पीएचसी की शानदार इमारतें मरीजों को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही हैं। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो ऐसे हैं जिन पर एलोपैथिक डॉक्टरों की जगह आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक डॉक्टर तैनात हैं। पैरामेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है।
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अधिकतर अस्पतालों में महिला डॉक्टर नहीं
जिले के अधिकतर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में महिला डॉक्टर ही नहीं है। केवल गोला, मोहम्मदी और धौरहरा में महिला डॉक्टर हैं। पलिया और निघासन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर नहीं हैं। महिलाओं को स्त्री रोगों का उपचार, प्रसव, नसबंदी आदि केलिए पुरुष डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ती है या सीधे मुख्यालय भागना पड़ता है। जिन अस्पतालों में महिला डॉक्टर तैनात भी हैं वे भी अस्पताल जाना पसंद नहीं करतीं।
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रात में अस्पतालों में रुकते नहीं डॉक्टर
सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के लिए आवास तो बने हैं लेकिन उन आवासों में रुकने के बजाय डॉक्टर शहर में रुकना पसंद करते हैं। दोपहर बाद से दूसरे दिन सुबह तक जरूरत पड़ने पर मरीजों को फार्मासिस्ट और वार्डब्वाय के सहारे ही रहना पड़ता है। इस बीच इलाज के अभाव में कई मरीज दम तोड़ देते हैं। बांकेगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अनिल की मौत डॉक्टरों की लापरवाही का ताजा उदाहरण है।
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हादसों में घायलों के इलाज का इंतजाम नहीं
ग्रामीण क्षेत्र में दुर्घटना में घायलों के इलाज का कोई इंतजाम नहीं है। रात विरात कोई हादसा हो जाए तो घायल को सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक तो डॉक्टरों का मिलना मुश्किल। अगर मिल भी जाएं तो इलाज के बजाय जिला अस्पताल रिफर कर अपनी बला टालने की फिराक में रहते हैं।
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संक्रामक रोगों के प्रति भी गंभीर नहीं स्वास्थ्य विभाग
किसी गांव में संक्रामक रोग फैलने पर पहले तो डॉक्टर उसे फूड प्वायजनिंग या सामान्य बीमारी साबित करने का प्रयास करते हैं। पानी सिर से ऊपर हो जाने या संक्रामक रोग से मौत होने पर ही स्वास्थ्य विभाग जागता है। बांकेगंज में एक माह पहले ही इसी बात को लेकर विवाद हो चुका है। डॉक्टरों की लापरवाही से डायरिया से एक मौत होने के बाद भी डॉक्टर ने गांव तक जाने की जहमत नहीं उठाई।
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वर्जन
शासन से जिले को 28 डॉक्टर और मिल गए हैं। इनमें 12 महिला डॉक्टर हैं। अब तक 14 डॉक्टर जिले में अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर चुके हैं। इन डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया जाएगा। अस्पताल में डॉक्टरों के न रुकने की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी।
-डॉ. एनएल यादव, सीएमओ
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लापरवाही से पहले
भी हुई हैं दो मौतें
सुर्खियों में रहा है बांकेगंज अस्पताल
बांकेगंज। स्थानीय सीएचसी के स्वास्थ्य सेवाएं पिछले काफी समय से प्रभावित हैं। लापरवाही का आलम ये रहा है कि गांव के लोगों को एसडीएम तक अपनी बात पहुंचानी पड़ी। हालांकि एसडीएम को स्वास्थ्य महकमे के आक्रोश का सामना तक करना पड़ा। पिछले माह डायरिया का प्रकोप चला तो गांव वजीरनगर में स्वास्थ्य सेवाएं न पहुंचने से दो लोगों को मौत के मुंह में जाने से नहीं बचाया जा सका।
मालूम हो 23 सितंबर 2012 को ब्लाक की ग्राम सभा वजीरनगर में डायरिया ने पैर पसार लिए लेकिन सीएचसी के लापरवाह चिकित्सक ने कोई सुधि नहीं ली। यहां संक्रामक रोग से दो लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में ग्रामीणों को एसडीएम की शरण लेनी पड़ी थी। बताते हैं कि एसडीएम भी अपने गुस्से को रोक नहीं सके थे। हालांकि बाद में इसका खमियाजा विरोध झेलकर उठाना पड़ा था। क्षेत्र में जनता के दर्द से बाकिफ सीएचसी के डॉक्टरों का अभी दिल नहीं पसीजता। सीएचसी के हालात बद से बदतर होते जा रहे है। डॉक्टरों की लापरवाही से होने वाली मौतों का सिलसिला कम होने का नाम नहीं ले रहा है।


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