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तिकुनियां, निघासन कई गांव बाढ़ से घिरे

Lakhimpur

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
पलिया में शारदा खतरा निशान से अब भी ऊपर
लखीमपुर खीरी। तिकुनियां, निघासन क्षेत्र में दर्जनों गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। प्रभावित परिवार ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। कहीं भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई इमदाद नहीं पहुंची है। चारों ओर पानी भरा होने से पीड़ित परिवारों के समक्ष भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई है वहीं पशुओं के चारे का संकट भी गहरा गया है। पलिया में शारदा का जलस्तर घटा जरूर है, लेकिन नदी अब भी वहां खतरा निशान से ऊपर बह रही है।
पलियाकलां। सोमवार को यहां नदी 154.00 पर बह रही थी जो खतरे के निशान से करीब 38 सेंटीमीटर ऊपर है। सुहेली नदी का उफान जारी है। इसके चलते दर्जनों गांवों का फसली इलाका बाढ़ग्रस्त हो गया है और कई के संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी चल रहा है। गोंडा-मैलानी रेल ट्रैक पर पलिया भीरा रेलवे स्टेशनाें के बीच दौलतापुर हाल्ट के पास यथास्थिति बनी हुई है। बनबसा बैराज से सोमवार को दोपहर तीन बजे शारदा में करीब 1.50 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी रिलीज किया गया।
तिकुनियां। क्षेत्र के करीब तीस गांवों में अभी भी बाढ़ का पानी घुसा हुआ है। उपकेंद्र में भी पानी घुस जाने से दो दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है। गांवों के लोग तीन चार फीट पानी में होकर किसी तरह आ जा रहे हैं। निबौरिया के मजरा गांव बंजरिया में पानी घुसने से लोगों में हड़कंप है।
बेलरायां। उफनाई मोहाना का पानी डेढ़ दर्जन गांवों में भरा हुआ है। ऊपर से लगातार तीन दिन से हो रही बारिश ने उनकी दिक्कतें और बढ़ा दी हैं। प्रभावित परिवार घर छोड़ सड़कों पर आशियाना बनाकर गुजर-बसर कर रहे हैं। ग्राम पंचायत भिड़ौरी की प्रधान रेखा राना ने कई गांवों में सब्जी, पूड़ी वितरण कराकर बाढ़ पीड़ितों को राहत दी।
बार्डर इलाके में मोहाना नदी से आई बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इस संबंध में एसडीएम रक्षपाल सिंह ने बताया कि लोगों को गांवों से निकालने के लिए गंगानगर, रननगर, सूरतनगर, डांगा, बदालपुरवा, बेलापरसुआ में नाव की व्यवस्था करा दी गई है। उन्होंने बताया कि सौ नावों की व्यवस्था कर ली गई है। प्रभावित परिवारों को मिट्टी तेल, राशन और भोजन के पैकटों को पहुंचाने के लिए लेखपालों को निर्देश दिया गया है।
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निघासन में पेड़ पर मचान बना शरण लिए हुए बाढ़ पीड़ित
निघासन। नेपाली नदियों में आई बाढ़ के कारण भारतीय सीमा पर बसे करीब दो दर्जन ग्राम पंचायतों में सोमवार दूसरे दिन भी बाढ़ का पानी भरा रहा। बाढ़ में फंसे लोगों व उनके बच्चों को निकालने के लिए प्रशासन ने कोई प्रबंध नहीं किया है। लोगों ने बाढ़ से बचने के लिए छप्पर व छतों पर अपना बसेरा बनाया है। दो दिनों से चांदनीपुरवा, महराजनगर, डांगा, कडिया, प्रतापपुरवा, रननगर, बदालपुरवा, लालापुरवा आदि गांव के लोग भूखे प्यासे अपने घरों पर चढे़ दुबके हुए हैं। चांदनी पुरवा निवासी चंद्र बहादुर, टीकाराम आदि ने बताया कि नाव की व्यवस्था न होने पर गांव में बच्चे भूखे प्यासे छप्पर पर बैठे है। उधर दक्षिण तरफ जलस्तर बढ़ने से निघासन के करीब एक दर्जन गांवों में शारदा का पानी भर गया है। पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोग अपनी जरूरत का सामान लेकर अपने घरों को पहुंच रहे हैं। उधर जीतपुरवा गांव के मुख्य मार्ग पर पानी भरा होने से लोग सिर पर सामान आदि रखकर निकलने को मजबूर है। इसके अलावा खमरिया, सेमरा पुरवा, पुरैना, लालबोझी, सुरजीपुरवा आदि गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। ठाकुर पुरवा गांव निवासी शत्रोहन ने बताया कि बाढ़ के पानी में सबसे बड़ी मुसीबत चारे की होती है।
चांदनी पुरवा निवासी खुशीराम, लालीराम, सुधीराम आदि ने बताया कि तीन बरस पहले गांव के कुछ लोग जंगल को मछली मारने गए थे। वहां पर वन विभाग ने नाव छीन लिया था। उसके बाद से प्रशासन ने नाव की व्यवस्था नहीं कराई है।
चांदनीपुरवा गांव के बाढ़ पीड़ित टीकाराम, चंद्र बहादुर आदि ने रूंधे स्वर में बताया कि प्रशासन ने लंच पैकेट, नाव आदि की व्यवस्था नहीं कराई है।
बाढ़ में फंसे लोगों की सुधि लेने के लिए किसी भी जनप्रतिनिधि ने गांव की ओर रुख नहीं किया है और न ही उनको बचाने के लिए कोई इंतजाम कर सका है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने गए कानूनगो अवधेश की मोबाइक डांगा एससबी चौकी के पास सड़क पर अधिक पानी होने के कारण खराब हो गई।
बाक्स-
निघासन। इस बार लंच पैकेट का एस्टीमेट नहीं बनवाया गया था। बाढ़ आई है अब तत्काल व्यवस्था की जा रही है। फिलहाल वहां पर लेखपाल को लगाया गया है।
-रक्षपाल, एसडीएम निघासन
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