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पीडीएस व्यवस्था पर ग्रहण

Lakhimpur

Updated Sun, 02 Sep 2012 12:00 PM IST
शिकायत और कार्रवाइयों की बढ़ती तादाद से व्यवस्था की खुली पोल
अगस्त माह में 15 कोटेदारों की दुकानें सस्पेंड और 30 निरस्त
कार्रवाई के दौरान 2.31 लाख रुपये की जमानत राशि जब्त
लखीमपुर खीरी। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पर अंकुश लगाने में प्रशासन सफल नहीं हो पा रहा है। अधिकतर ब्लाकों में कालाबाजारी की घटनाएं एकाएक बढ़ गई हैं। इससे गरीबों को दिया जाने वाला लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है। सरकार के दावे भी खोखले साबित हो रहे हैं, क्योंकि इसकी मानीटरिंग के लिए कोई ठोस उपाय नहीं हुए हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों का हाल और बुरा है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त माह में करीब 15 दुकानों को निलंबित और 30 दुकानों को निरस्त किया गया। वहीं गड़बड़ी पाए जाने पर 2.31 लाख रुपये जमानत राशि जब्त की गई।
कोटे की दुकानों से संबद्ध बीपीएल, अंत्योदय कार्डधारकों को सस्ती दर पर अनाज, चीनी व केरोसिन का वितरण किया जाता है। जबकि एपीएल कार्डधारकों को केवल केरोसिन दिया जा रहा है। कोटेदारों के कालाबाजारी किए जाने के मामले जुलाई की अपेक्षा अगस्त माह में एकाएक बढ़ गए। प्रशासन और पूर्ति विभाग कोटेदारों पर अंकुश लगाने में नाकाम हो रहा है। कार्रवाई का खौफ भी कोटेदारों को नहीं रहा, बीते जुलाई माह में 209 दुकानों की जांच की गई, जिसमें 56 दुकानों में अनियमितता पाई गई। लिहाजा दो दुकानदारों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई। वहीं 26 दुकानाें को निरस्त किया गया। 3.49 लाख रुपये कीमत की वस्तुएं जब्त करते हुए 1.13 लाख रुपये की जमानत राशि भी जब्त की गई। फिर भी कोटेदारों ने अपना काम जारी रखा।
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14 की जगह महज तीन निरीक्षक
सरकार योजनाएं लागू कर लोगों को लाभ मुहैया कराने के दावे खूब करती है, लेकिन पात्रों तक लाभ कैसे पहुंचे? इस पर अभी जोर नहीं है। लिहाजा कालाबाजारी ने वटवृक्ष का रूप धारण कर लिया है। पीडीएस को कंट्रोल करने के लिए पूर्ति विभाग के पास इस समय तीन पूर्ति निरीक्षक है, जबकि 14 पद स्वीकृत हैं। प्रत्येक ब्लाक पर एक पूर्ति निरीक्षक की तैनाती का प्रावधान है, लेकिन हालात एकदम उलट है। एक निरीक्षक के पास दो-दो तहसीलों का भार है।
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वर्जन.....
पूर्ति निरीक्षकों की कमी की बाबत शासन को अवगत कराया जा चुका है। इनकी कमी से निगरानी का कार्य प्रभावित होता है। हालांकि निगरानी तंत्र को मजबूत करने केप्रयास किए जा रहे हैं। शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है।
-ध्रुवराज यादव, जिला पूर्ति अधिकारी
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