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308 कटान पीड़ितों का पुरसाहाल नहीं

Lakhimpur

Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
पिछले साल के बसाए नहीं, इस साल की कौन कहे
लखीमपुर खीरी। बाढ़-कटान से पिछले साल बेघर हुए करीब एक हजार से अधिक कटान पीड़ित परिवारों को प्रशासन जहां बसा नहीं सका है वहीं इस साल के कटान पीड़ित करीब तीन सौ परिवारों को भी प्रशासन बसने की जगह उपलब्ध नहीं करा सका है, जिसके चलते यह सभी परिवार जहां-तहां सड़क किनारे खानाबदोशों का सा जीवन गुजारने को मजबूर हैं। यह और बात है कि जिला प्रशासन इन सभी पीड़ितों को शीघ्र बसाने की बात जरूर कर रहा है।
पिछले साल भी जिले में शारदा व घाघरा नदियों ने ही मुख्य रूप से तबाही मचाई थी। दोनों नदियों से 223 ग्राम प्रभावित हुए थे। सर्वाधिक रूप से पलिया व निघासन में क्रमश: 63-63 गांव प्रभावित हुए थे, जबकि धौरहरा में 58, लखीमपुर में 40 व गोला में 13 गांव बाढ़ प्रभावित हुए थे। तीन लाख से अधिक की जनसंख्या भी प्रभावित हुई थी तथा आठ लोगों की जान भी बाढ़-कटान में गई थी। प्रशासनिक आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल 1000 से अधिक लोगों के घर नदी में समा गए थे। प्रशासन ने पिछले साल भी उन्हें बसाने की कवायद की थी, प्रशासन का दावा है कि इसमें से करीब 185 परिवारों को वह बसा भी चुका है। प्रशासन की बात पर ही अगर यकीन किया जाए तो पिछले साल के ही 800 से अधिक कटान पीड़ितों के बसाने की व्यवस्था प्रशासन नहीं कर सका है।
इधर इस साल बरसात शुरू होते ही घाघरा ने धौरहरा तहसील क्षेत्र में तबाही मचानी शुरू कर दी। सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि का कटान करते हुए नदी ग्राम भदईपुरवा, मोटेबाबा आदि स्थानों पर करीब चार सौ घरों को अपने आगोश में ले चुकी है। प्रशासन की माने तो चालू सत्र में धौरहरा तहसील के करीब 300 तथा निघासन तहसील में आठ घर अब तक नदी में समा चुके हैं। डीएम मनीष चौहान स्वयं भी कटान प्रभावित गांवों का जायजा ले पीड़ितों को दुख-दर्द सुन चुके हैं। उनके निर्देश पर तहसील प्रशासन पीड़ितों को बसाने के लिए भूमि तलाशने में जुट गया है, लेकिन अब तक सभी पीड़ितों को बसाने की दिशा में जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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हर हाल में बसाए जाएंगे कटान पीड़ित
कटान पीड़ितों को हर हाल में बसाया जाएगा। धौरहरा के कटान पीड़ितों के लिए तहसील प्रशासन ने वहां कुछ जगह भी देखी है, लेकिन वह जगह कटान स्थल से अधिक दूर नहीं है। वहां बसने के लिए कटान पीड़ितों में आम सहमति नहीं बन पा रही है। कटान पीड़ित परिवार अगर अपनी सहमति जता देते हैं तो उन्हें बसा दिया जाएगा। भूमि खरीद कर कटान पीड़ितों को बसाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
-मनीष चौहान, जिलाधिकारी
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