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रेल ट्रैक बचाने को झाेंकी ताकत

Lakhimpur

Updated Sat, 11 Aug 2012 12:00 PM IST
दौलतापुर में शारदा में आई नरमी, कटान धीमा
पलियाकलां। गोंडा-मैलानी रेल प्रखंड के पलिया और भीरा रेलवे स्टेशनों के बीच दौलतापुर में ट्रैक के पास जारी कटान अब धीमा पड़ गया है। कटान को रोकने के लिए रेल और सिंचाई महकमा बचाव कार्य में तेजी ले आया है। इससे गांव वालों की उम्मीदें एक बार फिर से जाग गई हैं।
बृहस्पतिवार को गोंडा-मैलानी रेल प्रखंड के पलिया-भीरा रेलवे स्टेशनाें के बीच दौलतापुर गांव में रेल ट्रैक को निशाने पर लिए हुए शारदा नदी के तेवर अब ढीले पड़ते नजर आ रहे हैं। यहां कटान की गति धीमी हो गई है। जबकि बीते दिन नदी का कटान काफी तेज था, रेल ट्रैक को भयानक खतरा नजर आ रहा था और बचाव कार्य की हालत ठीक नजर नहीं आ रही थी, लेकिन शुक्रवार को कटान की गति भी थम गई और दोनों ही महकमों ने काम में तेजी भी ला दी। बताया गया है कि कटान स्थल पर नदी ने कुछ हिस्सा छोड़ दिया है। सिंचाई महकमा पूर्व में खराब हुए कुछ परकोपाइनों को भी बना चुका है। नदी के तेवर यही रहे तो ट्रैक और गांव खतरे से बाहर हो जाएंगे।
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लगदाहन में शारदा ने पकड़ा जोर, नौ एकड़ जमीन फिर समाई
पलिया/मंहगापुर। लगदाहन गांव में शारदा नदी का कहर बढ़ता ही जा रहा है। यहां जारी कटान और तेज हो गया है और नदी में करीब नौ एकड़ खेतीहर जमीन फिर समा गई है। अब गांव और नदी के बीच महज करीब सात सौ मीटर का फासला रह गया है। इससे गांव वालों में फैली दहशत और भी बढ़ती जा रही है। प्रशासन की ओर से कटान रोकने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
शारदा नदी लगदाहन गांव के खेतीहर इलाके में हल्का-फुल्का कटान करती रहती थी लेकिन करीब दो महीने पहले गांव असल निशाने पर आया और नदी ने यहां जो कटान का सिलसिला शुरू किया वह फिर नहीं रुका। हालांकि कभी-कभी जलस्तर बढ़ने पर उसने कटान की गति जरूर धीमी की। कटान शुरू होने के पहले शारदा नदी की गांव से दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर बताई जाती थी। अब यह दूरी घटकर महज करीब सात सौ मीटर ही रह गई है। पिछले 24 घंटों में नदी ने आलोक मिश्रा की 15 बीघा, श्रीराम की चार बीघा, श्याम बिहारी की चार बीघा, रामदुलारे की चार बीघा, बजरंगी की 10 बीघा, रामप्रसाद की चार बीघा समेत करीब नौ एकड़ खेतीहर जमीन अपने आगोश में समा ली। नदी का कटान जिस तरह से जारी है उसको देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि खेतीहर जमीन को काटकर जल्द ही नदी गांव को अपनी जद में ले लेगी। इससे गांव वालों में फैली दहशत और भी बढ़ गई है। इधर प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। उसने कटान रोकने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाए हैं, इससे गांव वालों में गुस्सा है।
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