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तराई में अब बागों के वजूद पर संकट

Lakhimpur

Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
परमिट की आड़ में जारी है अवैध कटान
अफसरों की जुगलबंदी से ठेकेदारों की चांदी
मामला संज्ञान में आने पर भी नहीं होती वाजिब कार्रवाई
लखीमपुर खीरी। जिले में बागों के वजूद पर खतरा मंडराने लगा है, क्योंकि फलदार वृक्षों का कटान जोरों पर है। हालांकि वन विभाग इसके लिए परमिट जारी करता है, लेकिन इसमें भी काफी घालमेल है। खासकर जारी परमिट में कटने के लिए वृक्षों की संख्या से कहीं अधिक वृक्षों का कटान किया जा रहा है। इसमें वन विभाग व संबंधित थाने की पुलिस का भी रोल रहता है, जिसके चलते ठेकेदार भी बेखौफ हैं।
तराई में बागों के सफाए का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। पिछले दो दशक में सबसे ज्यादा आम के बागों को निशाना बनाया गया है, जिसके चलते आम की कई देशी किस्में तराई से लुप्त हो गई है या फिर लुप्तप्राय की श्रेणी में आ गई हैं। इन्हें बचाने की दिशा में कोई प्रयास भी नहीं हो रहे। वृक्षों के कटान के बाद उस स्थान पर नए वृक्ष लगाने की दिशा में भी कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। वृक्षों के अवैध कटान को रोकने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वन विभाग पर है। इसके बाद संबंधित थाने की पुलिस भी जिम्मेदार है। बावजूद इसके दोनों विभागों की मिली भगत से हरे फलदार बागों का कटान धडल्ले से जारी है। बात यहां तक ही सीमित नहीं है, बल्कि परमिट से अधिक पेड़ काटने के भी मामले सामने आए हैं। अधिकांश मामलों में अधीनस्थों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से अफसर बचते रहे हैं। वन विभाग, पुलिस विभाग के साथ ही उद्यान विभाग की संलिप्तता रहती है, क्योंकि उद्यान विभाग द्वारा बिना स्थलीय सत्यापन किए ही फलदार वृक्षों की बदलकर पेश की जा रही है।
बाक्स
नहीं होती ठोस कार्रवाई
शारदानगर वन क्षेत्र के गांव इकबालपुर में 26 पेड़ों के कटान का परमिट जारी किया गया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार ने 44 पेड़ों को कटवा डाला। इस मामले में गांव इकबालपुर निवासी अनिल वर्मा ने डीएम समेत उच्चाधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले में वन विभाग ने बिना परमिट काटे गए वृक्षों का जुर्माना वसूलकर इतिश्री कर ली। जबकि अवैध कटान की पुष्टि होने पर वन क्षेत्राधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
बाक्स
राजस्व को पहुंचा रहे क्षति
बिना परमिट के काटे जाने वाले वृक्षों से राजस्व को भी काफी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि प्रत्येक परमिट में वर्णित पेड़ों की संख्या से कहीं अधिक कटान किया जाता है। इसमें वन अधिकारी व संबंधित क्षेत्र की पुलिस का समर्थन रहता है।
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