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राखियों पर चाइनीज ड्रेगन हुआ काबिज

Lakhimpur

Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
बाजार हुआ गुलजार, रंगबिरंगी छटा बिखेर रही हैं राखियां
देश के कोने-कोने से अलग-अलग आकार-प्रकार की सुंदर आकर्षक हैं राखियां
चाइनीज राखियों की चमक-दमक के साथ परंपरागत रेशम और सूत की अहमियत बरकरार
लखीमपुर खीरी। राखी के बाजारों पर भले ही चाइनीज ड्रेगन ने कब्जा जमा लिया है पर आज भी रेशम और सूत के धागों की बिक्री में कोई कमी नहीं आई है। बहनें अगर चीन की चमक-दमक में खो रही हैं तो रेशम और सूत के धागों के महत्व को बरकरार रखे हुए हैं। रक्षाबंधन का त्योहार आते-आते पिछले चार दिन पहले से ही बाजार हर तरफ रंग बिरंगी राखियों की छटा से गुलजार नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों से चीन में बनी सुंदर एवं आकर्षक राखियां हर उम्र के लोगों की पसंद बनती जा रही हैं। सस्ती और आकर्षक होने की वजह से इन राखियां की बिक्री भी अन्य की अपेक्षा अधिक हो रही है।
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बच्चोें के लिए कार्टून वाली राखियां
राखी के त्यौहार के लिए सजे बाजार में इस बार जहां बड़ों को मोती, सीप, चमकीले पत्थर और आकर्षक रंगों से सजी राखियां भा रही हैं, वहीं बच्चों के लिए कार्टून वाली राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। स्वास्तिक ओम और कलश वाली राखियों को भा रही हैं। चीन से आने वाली राखियां सस्ती और आकर्षक होने की वजह से पिछले तीन वर्षों से राखी मार्र्केट में अपनी पैठ बना चुकी हैं। इस बार धमाकेदार उपस्थिति लगा चुकी हैं। लुहावनी ये राखियां पांच से पच्चीस रुपये तक बिक रही हैं। राखियों की खरीददारी शुरू हो चुकी है।
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देसी राखी बाजार से हो रही नदारद
सूत, जूट और रेशम से बनी देसी राखी बाजार में अपना अस्तित्व बचाने में लगी है। परंपरागत राखियों को महत्व देने वाले अभी भी इनकी खरीद-फरोख्त करते हैं। बिक्री कम होने पर स्थानीय दस्तकार राखियां बना तो रहे हैं लेकिन उनकी बिक्री कम होने से मायूस हैं। ग्राहक का नजरिया बदलने की वजह से ही अपने हाथ के कारीगर बेबस हैं। स्थानीय दस्तकारों द्वारा बनाई जाने वाली राखी आज से चार साल पहले खूब बिकती थीं लेकिन जब से राखी के बाजार में विदेशी घुसपैठ हुई है तबसे इन कारीगरों की उपेक्षा हो गई है।
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सोने-चांदी की राखियां
स्वर्णकारों के यहां भी राखियों का सीजन शुरू हो चुका है। सोने और चांदी की दुकानें पर ढाई सौ से ढाई हजार तक की राखियां हैं। स्वर्ण व्यवसायी अतिन गर्ग ने बताया कि मथुरा, दिल्ली और मुंबई से सोने-चांदी की राखियां यहां आई हैं। मुंबई की राखियां विदेशी डाई मशीन से तैयार होने के कारण बेहद साफ-सुथरी और चमकदार हैं। पिछले वर्ष की भांति अगर व्यापार हुआ तो सोने और चांदी की व्यापारियों को यह त्योहार फायदेमंद रहेगा।
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