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दस सितंबर को होगा संचालकों का चुनाव

Lakhimpur

Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
गोला गोकर्णनाथ। न्याय पंचायत स्तरीय प्रारंभिक कृषि ऋण सहकारी समितियों में संचालक मंडल का कार्यकाल नौ जुलाई को समाप्त हो जाने के बाद नए संचालक मंडल के गठन की घोषणा कर दी गई है। अब संचालकों का चुनाव 10 और सभापति उपसभापति का चुनाव 11 सितंबर को होगा।
सहकारी समितियों के कार्यों के सही संचालन और कर्मचारियों की मनमानी पर दखल देने के लिए तीन वर्ष के लिए संचालक मंडल का गठन होता है। पूर्व में हुए चुनाव के कारण संचालक मंडल का कार्यकाल नौ जुलाई को समाप्त हो गया।
जिला सहायक निबंधक विनोद कुमार पटेल ने बताया कि निबंधक देवाशीष पांडे और संयुक्त निबंधक पीके सिंह द्वारा की गई चुनावी घोषणा में सहकारी समितियों में 10 सितंबर को संचालकों एवं 11 को सभापति, उपसभापति के साथ ही अन्य संस्थाओं में भेजे जाने वाले प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। श्री पटेल ने बताया कि तीन अक्तूबर को सहकारी संघ, 25 अक्तूबर को क्रय विक्रय समितियों, 19 नवंबर को केंद्रीय उपभोक्ता भंडार, 10 दिसंबर को जिला सहकारी बैंक में संचालकों का चुनाव कराया जाएगा। अगले दिन इस संस्थाओें में संचालक मंडल का गठन करा दिया जाएगा।

-बाक्स-
बकायेदार नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
गोला गोकर्णनाथ। एआर वीके पटेल ने स्पष्ट किया है कि सहकारी समितियों से लेकर शीर्ष संस्थाओं तक के चुनाव में समितियों के बकायादार न तो चुनाव लड़ सकेंगे और न ही किसी प्रत्याशी को वोट ही दे सकेंगे।
श्री पटेल ने बताया कि सहकारी समिति निर्वाचन नियमावली में बकाएदार को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने का प्राविधान है। इसलिए प्रजातंत्र में बकाएदार इस प्रतिनिधि सम्मान से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने के इच्छुक बकाएदारों के पास अभी समय है। वह अपनी बकाया समय से चुकता कर चुनावी प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।

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एकल हस्ताक्षरों से चलेगा कामकाज
गोला गोकर्णनाथ। सहकारी समितियों में संचालक मंडल का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद इस बार किसी प्रशासक की नियुक्ति की व्यवस्था नहीं की गई है, जबकि समितियों के प्रबंध निदेशक/सचिव के एकल हस्ताक्षर से ही कामकाज चलता रहेगा।
पिछले वर्षों में ऐसा रहा है कि संचालक मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विभागीय अधिकारी अथवा सत्ता पक्ष ने अपने प्रतिनिधि प्रशासक बना दिए। जिनसे अगले चुनाव तक कामकाज होता रहा, लेकिन इस बार ऐसी व्यवस्था नहीं है और एकल हस्ताक्षर से समिति और सदस्य हित के सारे काम होते रहेंगे। केवल नए कार्य और वित्तीय व्यय के लिए अधिकारियों की अनुमति की आवश्यकता पड़ेगी।
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