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आधी-अधूरी तैयारी के साथ बाढ़ से निपटेगा प्रशासन

Lakhimpur

Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। पिछले साल बाढ़ की विभीषिका से हुए नुकसान के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया। जिले की पांच तहसीलों के बाढ़-कटान प्रभावित 326 गांवों में तैयारी के नाम पर प्रशासन के पास सिर्फ खुद की मात्र 26 नावें मौजूद हैं। इसके अलावा 57 गोताखोर ही यहां जिला प्रशासन को खोजे मिल सके हैं। प्रशासन की आधी-अधूरी यह तैयारी तब है जब पिछले दो सालों में बाढ़ वर्षा से 50 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं।
पिछले साल आई बाढ़ से जिले की लखीमपुर, निघासन, धौरहरा, गोला व पलिया की तहसील क्षेत्र के करीब 326 ग्राम पंचायतों में निवास करने वाले लोगों की नींद इस हल्की बारिश ने उड़ा दी है। उनकी रातें आंखों में कट रही हैं। वजह,ये सभी वह गांव है जहां पिछले साल बाढ़ ने तांडव मचाने के साथ 83 गांवों में कटान भी किया था। शारदा व घाघरा के कटान से बीते सालों में हजारों परिवार उजड़ चुके हैं। पिछले साल ही इस दैवी आपदा से करीब 3.5 लाख लोग प्रभावित हुए थे। करीब दस हजार घर व जमीन नदी में समाने के बाद खानाबदोशों सा जीवन गुजार रहे हैं। वर्ष 2010-11 में 48 लोगों की तथा वर्ष 2011-12 में कई लोगों की जानें बाढ़-वर्षा के कारण जा चुकी है। कई पशु भी असमय काल के गाल में समा गए थे। इन नुकसानों के एवज में पिछले साल ही प्रशासन को करीब करोड़ों रुपये की सहायता पीड़ितों में वितरित करनी पड़ी थी। नावों के नाम पर प्रशासन पर सिर्फ 26 अपनी नावें हैं। जबकि इससे कई गुना अधिक नावें लोगों की खुद की हैं। यही नहीं प्रशासन अपने पास मौजूद जिन 26 नावों की बात कह रहा है, उनमें से भी अधिकांश की हालत ऐसी नहीं बताई जा रही जो बाढ़ के समय लोगों को बचाने में काम आ सके। किसी नाव की तली में सुराख दिख रहा तो कोई टूटी व कमजोर बताई जा रही है। सिंचाई महकमे के पास शारदा नगर में दो स्टीमर पहले से थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद यहां दो और मोटरवोट पहुंच गई हैं, लेकिन इन्हें चलाने के लिए चालक की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बाढ़-कटान में फंसे लोगों को सिंचाई महकमा कैसे मदद कर पाएगा? यह भविष्य ही तय करेगा।

-बाक्स-
जिले में मौजूद नावों की संख्या
तहसील नावें सरकारी नावें निजी योग
लखीमपुर 14 62 76
मोहम्मदी 00 02 02
निघासन 00 100 100
धौरहरा 12 174 186
गोला 00 09 09
पलिया 00 36 36
--------------------------------------
कुल योग 26 383 409
--------------------------------------
गोताखोर की संख्या
लखीमपुर 00
मोहम्मदी 03
निघासन 13
धौरहरा 23
गोला 01
पलिया 17
कुल 57

-बाक्स-
पहली बार कुछ गंभीर दिखा सिंचाई महकमा
लखीमपुर खीरी। पिछले एक दशक से बाढ़ महकमा जिले में बचाव कार्य तब शुरू कराता था जब शारदा या घाघरा अपना कहर बरपाने लगती थीं। बाढ़ घोटाले में कार्रवाई के बाद जिले में पहली बार बचाव कार्य के प्रति सिंचाई महकमा कुछ गंभीर दिखा है। जिसके चलते इस बार कटान से कम नुकसान होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने दौरे के समय 18 करोड़ रुपये के बाढ़-कटान बचाव कार्य बरसात से पहले शुरू किए जाने की घोषणा की थी। इसमे सकेथू के निकट शारदा की धार मोड़ने तथा पीलीभीत-बस्ती मार्ग को कटान से बचाने की दिशा में बाढ़ खंड ने इसीसी बैग, जीईओ बैग तथा परक्यूपाइन के माध्यम से कार्य कराया है, लेकिन कुछ परक्यूपाइन पहली हल्की बाढ़ में ही ढह गए हैं। अधिशासी अभियंता एमओ सिद्दीकी ने बताया कि क्षतिग्रस्त परक्यूपाइन को ठीक कराने का काम शुरू कर दिया गया है। सिंचाई खंड प्रथम के अधिशाषी अभियंता अचित कुमार उपाध्याय ने बताया कि गोविंद नगर गांव को बरसात पूर्व बचाव कार्य करा कर पूरी तरह सेफ कर लिया गया है। इसी तरह भीरा-पलिया रेलवे लाइन को कटान से बचाने के लिए भी महकमे के अधिकारी ठेकेदारों के साथ जुटे हुए हैं।

-बाक्स-
प्र्रशासन जिले में संभावित बाढ़-कटान के खतरे के प्रति गंभीर नहीं है। हर साल बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए प्रशासन को करीब दो हजार नावों की व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रशासन की खोली गई बाढ़ चौकियां भी महज कागजों में काम कर रही हैं। बाढ़ में जनहानि को रोकने के लिए भी प्रशासन के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
कृष्णा अधिकारी, सदस्य, भाकपा (माले) केंद्रीय कमेटी
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