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250 स्कूलों में बच्चों की शिक्षा अधर में...

Lakhimpur

Updated Sat, 07 Jul 2012 12:00 PM IST
निर्माण प्रभारी को सौंपी गई बच्चों के नामांकन की जिम्मेदारी
शिक्षामित्रों की भर्ती का भी प्राविधान नहीं
आरटीई का पालन कराने में विभाग के सामने संसाधनों का टोटा
लखीमपुर खीरी। नए शिक्षा सत्र का आगाज हो गया है। शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के प्राविधानों को शत-प्रतिशत लागू करना अभी दूर की कौड़ी बना हुआ है। आरटीई की शर्तों के मुताबिक बच्चों को शिक्षा मुहैया कराना बेसिक शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी। अब 250 नए स्कूलों में बच्चों को नामांकन कर शिक्षण व्यवस्था को शुरू कराना उससे भी बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि इनमें बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षामित्रों का चयन भी नहीं कर सकते।
बता दें कि पूर्व में संचालित 1140 जूनियर व 2377 प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों का जबरदस्त टोटा बना हुआ है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरटीई की शर्तों को लागू कराने के लिए बीएसए ने प्राथमिक स्कूलों में 10,873 और जूनियर स्कूलों में 5,377 शिक्षकों की डिमांड शासन को भेजी थी। आरटीई की मुख्य शर्तों के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती स्कूलों में करनी होगी। मसलन 30 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक अनिवार्य होगा। वहीं कक्षा पांच से आठ तक 40 बच्चों पर एक शिक्षक रखे जाने का प्राविधान किया गया है। मौजूदा हालात एकदम इसके उलट हैं कि अधिकांश विद्यालयों में एक-एक शिक्षक ही तैनात है। जिले में कुल 3517 स्कूलों के सापेक्ष करीब 3900 कार्यरत हैं, जबकि 250 नए (निर्मित/निर्माणाधीन) स्कूल इस शिक्षा सत्र से शुरू हो गए हैं। आरटीई की शर्तों का पालन कराने के लिए इन स्कूलों में बच्चों का नामांकन कराने की जिम्मेदारी निर्माण प्रभारियों को सौप दी गई है। नामांकन के बाद इनकी शिक्षण व्यवस्था कैसे होगी? इस पर अभी अफसरों के बीच विचार चल रहा है। क्योंकि शिक्षामित्रों की भर्ती बंद होने से नए विद्यालयों में शिक्षकों की ही तैनाती करनी होगी। लिहाजा विभागीय अधिकारियों के सामने दुविधा की स्थिति बन गई है। अगर पुराने स्कूलों से हटाकर नए स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती करेंगे, तो उन स्कूलों में ताला लटकना तय है।

बाक्स
शिक्षकों की कमी अर्से से बनी हुई है, जिसकी सूचना शासन को दी जा चुकी है। नए स्कूलों में इसी सत्र से शिक्षण कार्य प्रारंभ कराया जा रहा है। फिलहाल निर्माण प्रभारियों को बच्चों के नामांकन का जिम्मा दिया गया है। शिक्षण व्यवस्था सुचारु करने के लिए प्रयत्न किए जा रहे हैं।
देवकी सिंह, बीएसए
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