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दवाओं और डाक्टरों की कमी से दिक्कत

Lakhimpur

Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
मरीजों की संख्या बढ़ी, जिला अस्पताल प्रशासन व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने में लगा
लखीमपुर खीरी। गर्मी का प्रकोप दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, ऐसे में मराजों की संख्या भी बढ़ी है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी तो पहले से है, इधर एक सप्ताह से तमाम आवश्यक दवाओं की भी कमी पड़ गई है। शासन ने बाहर से दवाएं लिखने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसलिए डॉक्टर भी बाहर की दवाएं लिखने से बचते हैं इसका सीधा असर गरीबों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
शासन की स्थानांतरण नीति के कारण जिले के लगभग छह डॉक्टरों का तबादला दूसरे जिलों में हो गया, तीन डॉक्टर पहले से निलंबित चल रहे थे, इससे डॉक्टरों की कमी हो गई। डॉक्टरों की कमी से मरीजों को आए दिन ओपीडी से लौटना पड़ता है। ऐसे में कुछ मरीज घंटों लाइन में लगकर जो डॉक्टर ओपीडी में मिल जाए उन्हीं को दिखा लेते हैं। इसके अलावा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने मरीजों को कोई दिक्कत न हो इसलिए इमरजेंसी में बैठने वाले डॉक्टरो से भी मरीज देखने को कहा है, इससे डॉक्टरों की कमी की समस्या का कुछ हद तक समाधान तो हो गया, लेकिन इधर एक सप्ताह से जिला अस्पताल में एमाक्सीसेलीन जैसी एंटी बायटिक दवा नहीं है। बच्चे, खाने वाली गोलियां नहीं खाते इसलिए उनके लिए बुखार, दस्त और पेचिश की पीने वाली दवाएं हैं, लेकिन एक हफ्ते से पीने वाली दवाएं भी नहीं हैं। दो दिन पूर्व बच्चे को दिखाने के लिए आया एक व्यक्ति इमरजेंसी में इसीलिए डॉक्टर से उलझ गया कि उसने बाहर से कोई दवा लिख दी थी। जिला अस्पताल में आए दिन इसी बात को लेकर तीमारदार डॉक्टरों से उलझते हैं। जब अस्पताल में दवाएं नहीं हैं तो डॉक्टर भी क्या करें।
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शीघ्र ही आएंगी दवाएं
जिला अस्पताल में सभी सामान्य दवाएं हैं। यदि कोई बहुत गंभीर मरीज आ जाता है तो थोड़ी दिक्कत हो जाती है, लेकिन ऐसी स्थिति में बाहर से दवाएं खरीदी जाती हैं। कोशिश यही की जाती है कि मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इधर बच्चों की कुछ दवाएं कम हैं। एमाक्सीसेलीन कैप्सूल दो दिन पहले ही समाप्त हुआ है, जो दवाएं नहीं हैं उनके लिए इंडेंट भेजा गया है, शीघ्र ही दवाएं आ जाएंगी। दवा के लिए किसी मरीज को वापस नहीं जाने दिया जाता है।
-डॉ. एनके शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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