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‘काम का बोझ यहां छीन रहा ‘सिस्टर’ के चेहरे की मुस्कान’

Lakhimpur

Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में वैसे तो डाक्टरों की कमी है ही, लेकिन सेहत महकमे में चिकित्सक तथा मरीज के बीच की अहम कड़ी कही जाने वाली ‘नर्स’ का भी खासा टोटा है। यह हाल तब है जब अकेले मेडिकल वार्ड में क्षमता से करीब दोगुने मरीज यहां भर्ती हैं। हालात यह है कि जिन नर्सों के कंधों पर अधिकतम दस मरीजों के देखभाल की जिम्मेदारी होनी चाहिए वह 40-50 मरीज देख रही हैं। काम के बोझ के इन सिस्टरों के चेहरे से अपनत्व की मुस्कान भी गायब होती जा रही है।
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है वहीं डाक्टरों और नर्सों की संख्या काफी कम है। गर्मी बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। पहले जहां प्रतिदिन करीब 400-500 मरीज यहां आते थे वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 600-700 तक पहुंच गई है। इसके अलावा इधर विभिन्न दुर्घटनाओं में घायल होकर तथा जहर खाने से भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। सस्ते व अच्छे इलाज के लिए यहां आने वाले तमाम मरीज चिकित्सक अभाव के कारण मजबूरन फिर निजी चिकित्सकों के यहां पहुंच अपना शोषण कराते हैं। जिला अस्पताल के लिए काफी पहले चिकित्सकों के तय किए गए मानक के मुताबिक भी अब यहां चिकित्सक नहीं है, जबकि मरीजों की संख्या पहले से करीब दो से तीन गुनी तक पहुंच गई है। जिला अस्पताल के लिए 26 डाक्टरों के पद स्वीकृत है। इसमें से यहां मात्र 22 चिकित्सक ही नियुक्त हैं, इनमें से भी एक चिकित्सक लंबे अवकाश पर चले गए तथा एक चिकित्सक दो साल की ट्रेनिंग पर गए हैं। दो चिकित्सक निलंबित चल रहे हैं। इस प्रकार 26 डाक्टरों की जगह यहां मात्र 18 चिकित्सक ही कार्य कर रहे हैं।
चिकित्सक व मरीज के बीच की अहम कड़ी कही जाने वाली ‘सिस्टर’ (नर्स) की संख्या भी यहां काफी कम है। जिला अस्पताल में इनके लिए 23 पद स्वीकृत है, लेकिन यहां मात्र 16 नर्स ही हैं। विभागीय नियमों के मुताबिक एक नर्स पर 10 बेड के मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी होती है, लेकिन यहां एक-एक नर्स के जिम्मे 40-50 मरीजों की देखभाल का जिम्मा आन पड़ा है। यही वजह है कि काम के बोझ ने मरीजों के प्रति अपनत्व दिखाने वाली इन नर्सों के चेहरे पर हर समय खिली रहने वाली मुस्कान अब गायब होती जा रही है। मरीजों के तीमारदारों तथा अस्पताल प्रशासन के बीच गाहे-बगाहे होने वाले विवाद की भी यही वजह है।
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